Monday, 12 August 2019

बरसात के मौसम में कैसे रखे सेहत का ध्यान व बीमारियों से कैसे बचें -How to take care of health and avoid diseases during the rainy season by WISE HEALTH

                               Rainy Season 

             बरसात  के दिनों में आसमान से बरसते ठंडे पानी से मिलने वाला सुकून हर किसी की चाहत होती है। गर्मी से परेशान लोग बरसात का मौसम आते ही खुश हो जाते हैं, लेकिन ये मौसम अपने साथ कई तरह की बीमारियां लाता है । आईये बात करते हैं उन्हीं बीमारियों और उनके उपचार के बारे में जो बरसात के दिनों में होती है :-

बरसात के मौसम में कैसे रखे सेहत का ध्यान व बीमारियों से कैसे बचें  How to take care of health and avoid diseases during the rainy season by WISE HEALTH


बरसात का सुहाना मौसम कई बार तकलीफ का  कारण बन जाता है। बारिश चाहे कम हो या ज्यादा, लेकिन बीमारियां आती जरूर है । ऐसे में ज़रूरत है बरसात से जुड़ी समस्याओं की रोकथाम और इलाज की पूरी जानकारी का होना।

भीषण गर्मी के बाद  हर कोई बेसब्री से बरसात  के मौसम का इंतजार करता है। बारिश की बूंदों से मिलने वाला सुकून हर किसी की चाहत होती है। गर्मी से परेशान लोग बरसात का मौसम आते ही खुश हो जाते हैं। बारिश में भीगने का अलग ही आनंद है इसलिए कई लोगों के लिए मानसून किसी उत्सव या किसी त्योहार से कम नहीं होता  है।

   बरसात का मौसम  अपने साथ कई तरह की बीमारियां जैसे कि डेंगू, चिकनगुनिया, पीलिया, टायफाइड, डायरिया आदि लेकर आता है। आज हम बरसात के मौसम में होने वाली उन्हीं बीमारियों और उनके उपचार के बारे में चर्चा करेंगे जिनकी वजह से सावन के मनोहर वातावरण की किरकिरी होने में देर नहीं लगती।

खांसी -जुकाम 

खांसी -जुकाम

बारिश के मौसम में यह बीमारी आम है। काफी देर तक शरीर में नमी रहने के कारण सर्दी-खांसी के बैक्टीरिया जन्म लेते हैं जिससे सर्दी-जुकाम, बुखार और खांसी जैसे रोगों की संभावना बढ़ जाती है। इससे बचाव के लिए बारिश में भीगने से बचना जरुरी है। अगर किसी वजह से भीग भी जाते हैं तो तुरंत कपड़े बदलकर सूखे कपड़े पहन लेना चाहिए। सर्दी-जुकाम से संक्रमित व्यक्तियों से संपर्क के बाद हाथ ठीक से धोएं। अधिक परेशानी होने पर डॉक्टर से संपर्क करें।

खुजली और दाने

मानसून के आते ही शरीर में फंगस(Fungus), दाद, खाज, खुजली और लाल रंग के दाने लोगों को परेशान करने लगते  हैं। यह समस्या परिवार के एक सदस्य से दूसरे को तेजी से फैलती  है। ऐसे में बिना देर किये  डॉक्टर को दिखाएं, खुद से इलाज न करें, संक्रमित व्यक्ति के कपड़ो को सबके कपड़ो से अलग रखे ।


मलेरिया

बारिश में जगह-जगह पानी इकट्ठा हो जाने से मलेरिया की संभावना काफी प्रबल रहती है। मादा एनिफिलीज मच्छर के काटने से होने वाला यह रोग एक संक्रामक रोग है और दुनिया के सबसे जानलेवा बीमारियों में से एक है। इसलिए इसे हल्के में लेना भारी पड़ सकता है। यदि बुखार और बदनदर्द के साथ आपको कंपकंपाहट हो रही है तो यह लक्षण मलेरिया के हैं। मच्छरों के काटने से खुद का बचाव करना इसके रोकथाम का पहला मंत्र है। इसके लिए रात को सोते समय मच्छरदानी का प्रयोग, घर के आसपास पानी न इकट्ठा होने देना और नालियों में डीडीटी का छिड़काव जैसे तरीके अपनाए जा सकते हैं। मलेरिया के लक्षण दिखते ही तुरंत डॉक्टर से संपर्क करने में ही समझदारी है।


हैजा

दूषित जल और अस्वच्छता की बरसात के मौसम में कोई कमी नहीं होती और इनकी वजह से फैलने वाला रोग जिंदगी का सबसे बड़ा खतरा बन सकता है। आस-पास की गंदगी हैजा फैलने का सबसे बड़ा कारण है। इस रोग के होने पर दस्त और उल्टियां आती हैं, पेट में तेज दर्द होता है, बेचैनी और प्यास की अधिकता हो जाती है। इससे बचने के लिए आसपास की सफाई के अलावा पानी उबालकर पीना चाहिए। इस रोग से बचाव का सबसे अच्छा उपाय टीकाकरण है। यह सुलभ भी है और सबसे ज्यादा विश्वसनीय भी। समय रहते रोगी का उपचार जरुरी है क्योंकि हैजा जानलेवा भी हो सकता है।


टाइफाइड

   टाइफाइड , मानसून के दिनों की सबसे खतरनाक बीमारियों में से एक है । संक्रमित जल और भोजन से होने वाले इस रोग में तेज बुखार आता है जो कई दिनों तक बना रहता है। ठीक होने के बाद भी इस बीमारी से होने वाला संक्रमण रोगी के पित्ताशय में जारी रहता है जिससे जीवन का खतरा बना रहता है। संक्रामक रोग होने के कारण टाइफाइड के रोगी को लोगों से दूर रहना चाहिए। टीकाकरण इस बीमारी को रोकने के लिए बहुत जरुरी है। ज्यादा से ज्यादा तरल पदार्थों का सेवन इस रोग से बचाव के लिए फायदेमंद होता है।


डेंगू और चिकनगुनिया

बारिश के मौसम में डेंगू और चिकनगुनिया ऐसी बीमारियां हैं जो बहुत ज्यादा फैलती  हैं। दरअसल, डेंगू और चिकनगुनिया बारिश में इसलिए भी खतरनाक होती हैं क्योंकि डेंगू और चिकनगुनिया का लार्वा नमी मिलते ही सक्रिय हो जाता हैं। आपको जानकर हैरानी होगी जहां मरम्मत या निर्माण का काम चल रहा होता है वहां डेंगू और चिकनगुनिया का लार्वा सबसे ज्यादा पाया जाता है। पानी भरे होने के कारण लार्वा जल्दी एक्टिव हो जाता है। डेंगू और चिकनगुनिया मादा एडिस एजिप्टी मच्छर के काटने से फैलते हैं। डेंगू और चिकनगुनिया के लक्षणों में तेज बुखार, जोड़ों में दर्द, मसल्स में और हड्डियों में दर्द की शिकायत, शरीर पर लाल चकते पड़ना, सिरदर्द होना और हल्की ब्लीडिंग होना बहुत आम है।

पीलिया

खून में Penicillin(पेनीसिलिन) नामक एक रंग होता है, जिसके बढ़ने से त्वचा पीली पड़ने लगती है। इस दशा को पीलिया या जॉन्डिस कहते हैं। दूषित पानी पीने से और कच्ची सब्जियां खाने आदि से यह बीमारी फैलती है। पेट में सूजन आना, भूख कम लगना, उल्‍टी या कब्‍ज की समस्या, सिरदर्द और थकावट इसके प्रमुख लक्षण हैं। अगर आपको ऐसे कोई भी लक्षण दिखाई दें तो आप डॉक्टर से सीधे सम्पर्क करें। इसके अलावा बारिश के मौसम में पानी उबाल कर पिएं। दूषित पानी के सम्पर्क में आने से बचें। प्रोटीन युक्‍त खाना खाएं, ग्‍लूकोज लें और गन्‍ने का रस पीएं।

यैलो बुखार

लेप्टोस्पायरोसिस(Leptospirosis)को फील्ड फीवर, रैट काउचर्स यैलो और प्रटेबियल बुखार के नाम से भी जाना जाता है। ये एक संक्रमण है जो लेप्टोस्पाइरा कहे जाने वाले कॉकस्क्रू आकार के बैक्टीरिया से फैलता है। बैक्टीरिया से फैलने वाला लेप्टोस्पाइरोसिस रोग बारिश के मौसम में सबसे ज्यादा होता है। यह रोग ऐसा है जो खुद ही कई और रोगों को पैदा करने का कारण भी हो सकता है। इस रोग का बैक्टीरिया मानव में सीधे ही प्रवेश न करके जीवों जैसे भैंस, घोड़ा, बकरी, कुत्ता आदि की सहायता से प्रवेश करता है और इस बैक्टीरिया का नाम है लैप्टोस्पाइरा। यह बैक्टीरिया इन जानवरों के मूत्र विसर्जन से प्रकृति में आता है। यह नमी युक्त वातावरण में लम्बे समय तक जीवित रहता है। इसके लक्षणों में हल्के-फुल्के सिरदर्द, मांसपेशियों में दर्द और बुखार से लेकर फेफड़ों से रक्तस्राव या मस्तिष्क ज्वर जैसे गंभीर लक्षण शामिल हो सकते हैं।


1. अपने साथ हमेशा बारिश से बचने का इंतजाम रखें : बारिश के मौसम में खुद की सुरक्षा की तरह यह एकदम सही कदम होगा। अपने साथ एक बड़ा छाता या रेनकोट रखें। अपने सिर को न भीगने दें।
2. गंदे पानी के संपर्क में न आएं : चाहे पानी रोड पर भरा हो या मौका पानी पीने का हो। आपको हर तरह से खुद को खराब पानी से दूर रखना है। गंदा पानी अंदर से और बाहर आपको भारी नुकसान पहुंचाता है। फंगल इंफेक्शन और बैक्टेरियाजनित इंफेक्शन से बचने के लिए पानी पर विशेष ध्यान दें।
3. विटामिन सी की उचित मात्रा लें : बारिश के मौसम में विटामिन सी से भरपूर चीज़ों का सेवन बढ़ा दें। विटामिन सी आपके शरीर की इम्यूनिटी बढ़ाने के अलावा, सर्दी को भगाने का काम तेजी से करता है।
4. पैरों और नाखून को साफ रखें : अपने पैरों और नाखूनों की सुरक्षा पर विशेष ध्यान दें। यहां आपको इंफेक्शन से बचना है। नाखून के माध्यम से गंदगी को शरीर में जाने से
रोकना जरूरी है। खुद की सफाई करते रहें। बार बार हाथ धोएं और हो सकें तो अपने साथ एक हैंडसेनेटाइजर रखें।
5. बारिश में भीगने के बाद एक बार और नहाएं : आपको सुनकर भले ही अजीब लगे लेकिन यह जरूरी है। अगर आप बारिश में भीग गए हैं तो नहाने से आपको इंफेक्शन होने का खतरा लगभग खत्म हो जाएगा। बढ़िया से स्नान के बाद, खुद को सुखाएं।
`6. बाहर खाने से बचें : स्ट्रीट फूड या खुले में रखे खाने को खाने से बचें। आपकी इच्छा जरूर होगी लेकिन ये मौसम बीमारियों का मौसम है। आप बीमार पड़ सकते हैं।
7. गर्म पीने की कोशिश करें : बारिश के मौसम में तापमान नीचे जाता है। अपने आप ही आपको कुछ गर्म खाने का मन करेगा। सूप, गर्म दूध या अदरक की चाय जैसे कुछ ऑप्शन आप अपना सकते हैं। आपको तुरंत अच्छा महसूस होगा साथ ही आपके स्वास्थ्य के लिए भी यह अच्छा साबित होगा।
8. खुद को सूखा रखें : अगर आप भीग गए हैं तो आप मुश्किल में हैं। आप गीले बैठे हैं। हो सकता है गीले ही एसी कमरे में चले जाएं। पंखे के नीचे खुद को सुखाने की कोशिश करें। इतनी देर में आपको सर्दी और इंफेक्शन का खतरा है। बेहतर होगा अपने साथ दूसरे कपड़े बदलने का इंतजाम रखें।

9. डाइट पर ध्यान दें : अपनी डाइट को बदल ले । यह मौसम भारी और अधिक खाने का नहीं है, हल्का सुपाच्य और हेल्दी खाना खाएं। कम खाना  खाने की कोशिश करें। खाना बनाने और स्टोर करने में सफाई का  ख्याल रखें। कीड़ों से घर को सुरक्षित रखने की कोशिश करें।
10. हर्बल टी और पेय पीते रहें : साधारण चाय और सूप के अलावा हर्बल टी को भी इस मौसम में अपनाना अच्छा रहता है । लौंग, हल्दी, तुलसी, अदरक और केसर के प्रयोग से बने पेय पीते रहना चाहिए , इनसे  न केवल  आपका तापमान संतुलित रहेगा बल्कि आपका इम्यूनिटी सिस्टम भी मजबूत होगा।

अधिक परेशानी होने पर डॉक्टर से संपर्क करें।

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