Wednesday, 12 June 2019

वेज(शाकाहारी ) डाइट के फायदे एवं नुकसान -Benefits and disadvantages of vegetarian diet in Hindi


शाकाहारी भोजन अगर आप शाकाहारी हैं और यह सोचकर परेशान हैं कि आपकी सेहत का क्या होगा तो आपको इस बात पर ध्यान देने की जरूरत है कि सेहत बनाने के लिए  और शरीर को स्वस्थ रखने के लिए शाकाहारी भोजन में भी कई विकल्प मौजूद होते  हैं, जोकि हमें  मांसाहार के बराबर ही पोषक तत्व प्रदान करते  हैं। भोजन वही अच्छा होता है जिसमे प्रोटीन , कर्बोहाइड्रेट( Carbohydrates), वसा (fats) , विटामिन ,खनिज लवण , रेशा और जल तत्व मौजूद हों। शाकाहारी भोजन में शामिल अनाज , दाल , सब्जी , फल और दूध आदि से ये सभी(प्रोटीन , कर्बोहाइड्रेट( Carbohydrates), वसा , विटामिन ,खनिज लवण) लाभदायक तत्व भरपूर मात्रा में मिल जाते है।
इसके अलावा कई प्रकार के एंटीऑक्सीडेंट्स और विटामिन शाकाहारी खाने से ही मिलते है जो बीमारियों से लड़ने में मदद करते है। शाकाहारी भोजन में संतृप्त वसा(Saturated fat) और कोलेस्ट्रॉल की मात्रा कम होती है। जिसके  कारण शाकाहारी भोजन से Heart problem होने की संभावना कम होती है।

शाकाहारी भोजन  में रेशे की  मात्रा भरपूर होती है जिसके कारण आँतों की सफाई सुचारू रूप से  होती  रहती है। जिससे  ब्लड प्रेशर नियंत्रित रहता है व कोलेस्ट्रॉल , डायबिटीज और कैंसर से बचाव होता है।

रेशे के कारण भूख जल्दी नहीं लगती जिससे कि हम  जरुरत से ज्यादा खाने से बच जाते है। इस तरह से शाकाहारी भोजन मोटापे से बचाता है क्योंकि  मोटापा अपने साथ कई प्रकार की बीमारियां जैसे डायबिटीज , ब्लड प्रेशर , हृदय रोग आदि लेकर आता है।

शाकाहारी डाइट के फायदे -Benefits of vegetarian diet

फल और सब्जियों के फायदे 

पपीता में पैपेन एंजाइम व बीटा कैरोटीन नामक तत्व पाए जाते हैं, जो पाचन क्रिया को दुरुस्त बनाते हैं। नियमित सेब खाने से हम कैंसर से बचे रहते हैं। केले में कैरोटिनॉइड यौगिक पाया जाता है, जिससे अंधेपन का खतरा दूर होता है। नाशपाती में फाइबर का खजाना होता है। अनानास का रस चर्बी को पिघलाकर निष्कासित करता है। अंगूर के रस का नियमित सेवन करने से माइग्रेन की समस्या से काफी राहत मिलती है।
फल और सब्जियों का सेवन कई बीमारियों को दूर करने में मददगार हो सकता है। फल और सब्जियों का सेवन नवयुवाओं में नया जोश भरता है और उन्हें डिप्रेशन और बेचैनी से निजात दिला सकता है। जिन युवाओं ने फल और सब्जियों का प्रचुर मात्रा में सेवन किया उनका मानसिक स्तर जंक फूड खाने वाले युवाओं के मुकाबले बेहतर रहा।

Vitamin B12

Vitamin B12 शरीर के लिएबहुत  लाभकारी तत्व है। यह रक्त में नयी कोशिकाओं को बनाने में सहायक होता है। यह हमारे Nervous system को भी दुरुस्त रखता है। बढ़ते बच्चों के लिए यह लाभकारी होता है। यदि शरीर को पर्याप्त मात्रा में  विटामिन न मिले तो एनीमिया जैसी समस्याए  पैदा हो  सकती है।

मांसाहारी भोजन में Vitamin B12 अधिक मात्रा  में पाया जाता है, लेकिन इसके शाकाहारी स्रोत भी हैं। दूध, दही, पनीर भी Vitamin B12 के बेहतरीन स्रोत हैं। इनमें वसा भी प्रचुर मात्रा में होती है।

कैल्शियम, आयरन और Vitamin C  के लिए आप लाल मिर्च, नींबू सलाद, हरी पत्तेदार सब्जियों आदि का भी सेवन कर सकते हैं।

आयरन

आयरन सेहत के लिए एक आवश्यक खनिज  है। यदि शरीर में इसकी कमी हो जाए तो इससे याददाशत कमजोर होना, एकाग्रता में कमी जैसी समस्याएं हो सकती हैं।

आयरन की कमी को पूरा करने के लिए साबुत अनाज का आटा जैसे गेहूं चावल आदि, हरी पत्तेदार सब्जियां फलीदार सब्जियां, सूखे मेवे का सेवन किया जा सकता है।

जिंक

शारीरिक विकास के लिए जिंक काफी महत्वपूर्ण है। जिंक शरीर मे हार्मोन को संतुलित रखने, त्वचा को स्वस्थ बनाने, शरीर को संक्रमण से बचाने व शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने में सहायक होता है। इसकी कमी से शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता कम हो जाती है। शरीर जल्दी थकने लगता है।

बालों का झड़ना व दस्त आदि बीमारियां भी लग जाती हैं। हरी फलीदार सब्जियां, साबुत अनाज, जैसे राजमा, छोले आदि व सूखे मेवे भी जिंक का भरपूर स्रोत हैं।

कैल्शियम

मानव शरीर के लिए कैल्शियम सबसे महत्वपूर्ण खनिज है। शरीर की हड्डियों व दांतों की मजबूती के लिए यह अति आवश्यक है।

कैल्शियम की कमी से शरीर में हड्डियों का कमजोर होना या फिर ऑस्टियोपोरोसिस नामक बीमारी भी हो सकती है। दूध और डेयरी उत्पादों, हरी पत्तेदार सब्जियों, सूखे मेवे और बीज, सूखे फल का सेवन इस कमी को पूरा करता है।

प्रोटीन

आपकी शाकाहारी डाइट को ध्यान में रखते हुए आप सोयाबीन की बड़ियों और फलियों का सेवन कर सकते हैं। शोध और अध्ययन भी बताते हैं कि सोयाबीन से मिलने वाली प्रोटीन की मात्रा मांसाहारी भोज्य पदार्थों से मिलने वाली मात्रा के बराबर ही होती है।

शाकाहारी डाइट के नुकसान –disadvantages of vegetarian diet



शाकाहारी भोजन करने वालों में एक समय के बाद Vitamin B12 तथा ज़िंक , कुछ विशेष ओमेगा- 3 , Vitamin D 3 , सल्फर , या खून की कमी हो सकती है। शाकाहारी भोजन  में मौजूद लोह तत्व आसानी से शरीर में अवशोषित नहीं होते ।इसलिए अक्सर खून की कमी होने की परेशानी पैदा हो जाती है विशेषकर महिलाओं में माहवारी आदि के कारण यह समस्या होने की संभावना अधिक होती है। भारत जैसे देश में जहाँ अधिकतर लोग शाकाहारी है , ऐसा नहीं है की हार्ट की, डायबिटीज की या ब्लड प्रेशर की समस्या कम है। जो लोग शारीरिक गतिविधि कम करते है , स्मोकिंग या नशा आदि करते है या अधिक तला हुआ और ज्यादा घी खाते है ,उन्हें इस प्रकार की समस्या हो जाती है।
अतः पूरी तरह यह कहना गलत होगा कि शाकाहारी खाने से नुकसान हो ही नहीं सकता। इसके अलावा फल , सब्जी आदि में पेस्टिसाइड्स की मात्रा बहुत होती है।फलों को पकाने के लिए कई प्रकार के Harmful chemicals काम में लिए जाते है। गाय , भैंस का दूध Oxytoxin  के इंजेक्शन लगा कर निकाला जाता है जो कैंसर का कारण बन सकते है।

हेल्थ से सम्बंधित अधिक लेख पढ़ने के लिए हमारी वेबसाइट पर विजिट करें :https://www.wisehealths.com/

Tuesday, 11 June 2019

स्ट्रेस क्या है ? जानिए इसके लक्षण ,कारण और उपाय (What is stress and how to manage it?

                                                Stress 
मानसिक तनाव(Stress ) आजकल लोगो पर इतना हावी हो चुका है कि  लोगो को मनोचिकित्सा  का सहारा लेना पड़ रहा है| यह एक गंभीर बीमारी का रूप लेती जा  रही है जिसका इलाज काफी मुश्किल  है|हमें  हर रोज  अपनी जिंदगी में बहुत  मुश्किलों का सामना करना पड़ता  हैं। कई बार ऐसे हालात पैदा हो जाते हैं जिनसे हम चाह कर भी  संभाल नहीं पाते और  उनसे निपटने के चककर में हम काफी टेंसन (stress ) में चले जाते हैं
हम में से कई लोग तो  तनावों को झेलते हुए इतने  आदी हो चुके होते हैं कि वें महसूस ही नहीं कर पाते। ऐसे तनाव को यूस्ट्रेस (Eustress) कहा जाता है। अगर देखा जाए तो ये तनाव आपकी परफॉरमेंस और काम करने की क्षमता पर निगेटिव असर(negative effoct ) डालता है।

इस आर्टिकल में हम discus करेंगे कि  तनाव/टेंशन क्या है, तनाव के लक्षण, कारण और टेंशन से बचने के उपाय क्या हैं ?


स्ट्रेस क्या है? (What is stress?) :
स्ट्रेस या तनाव होना सामान्य सी  बात है। ये तब महसूस होता है जब किसी स्थिति से निपटना मुश्किल हो जाता है। टेंशन होने पर एड्रेनालाईन (Adrenaline -When a stressful situation occurs and your heart begins to race, your hands begin to sweat, and you start looking for an escape, you have experienced a textbook case of fight-or-flight response.) हमारे पूरे शरीर में दौड़ने लगता है जिससे  दिल की धड़कन बढ़ जाती है और मानसिक और शारीरिक चेतना बहुत ज्यादा बढ़ जाती है। हमें पसीना आता है, सनसनी महसूस होती है और कई बार पूरे शरीर के रोएं खड़े हो जाते हैं।

कितना खतरनाक(Harmfull ) है तनाव?

ऐसा नहीं है कि हमारे पूर्वजों(बुजुर्गों ) की जिंदगी में Stress नहीं  था, लेकिन वो करो या मरो (Do or Die )की स्थिति को अपनाकर आसानी से इससे निजात  पा सकते थे। आज हमारे जीवन में तनाव की मात्रा और उनकी आवृत्ति भी बहुत  ज्यादा ही  है। लेकिन सबसे मुश्किल  बात यह है कि Stress  देने वाले हार्मोन जैसे एड्रेलिन और कॉर्टिसोल का उत्सर्जन उस वक्त और ज्यादा harmfull  हो जाता है जब हमें उनकी जरूरत नहीं होती है । अगर तनाव लंबे वक्त तक रहेगा  तो हमारे इम्यून सिस्टम और हृदय को नुकसान पहुंच सकता है। इसके अलावा  तनाव के रहते  हमारी शारीरिक और मानसिक क्षमतापर भी प्रभाव पड़ता  है। इसका मतलब यह  है कि तनाव उस वक्त और  भी ज्यादा खतरनाक हो जाता है जब  हर पांच मिनट में करो या मरो (Do or Die )की स्थिति में जाना पड़े।

ज्यादा तनाव होने  से :
हमारे  इम्यून सिस्टम और हृदय को नुकसान पहुंच सकता है।
गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ता  है।
उम्र कम होती है।


तनाव को समझना क्यों जरूरी है? (Why does understanding stress matter?)

तनाव के कारण कई गंभीर मानसिक समस्याएं हो सकती हैं। भारत में हर चार में से एक इंसान हर साल Stress का शिकार हो  जाता है। तनाव के कारण  कई बार हम लोग काम करते हुए भी लंबे वक्त तक काम पर ध्यान केंद्रित नहीं कर पाते हैं।

अगर मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं को लंबे वक्त तक अनदेखा किया जाए जो ये गंभीर समस्या में बदल सकती  है। देश में Stress  और depression का इलाज करवाने वाले मरीजों में से तीन चौथाई महिलाएं हैं। लेकिन जो तीन चौथाई लोग टेंशन और डिप्रेशन के चलते आत्महत्या कर लेते हैं वह पुरुष हैं। चूंकि डिप्रेशन और टेंशन ही सुसाइड के मामलों के लिए अधिक  जिम्मेदार  साबित हुये  हैं इसलिए इसका  इलाज जरुरी है |

क्यों होता है तनाव? (What causes stress?)

आजकल होने वाले तनाव के सामान्य कारण निम्नलिखित हैं। जैसे -
1.काम
2.बेरोजगारी
3.पैसा
4.अलगाव और कुछ अन्य कारण जैसे घर छोड़ना
5.पार्टनर से ब्रेकअप
6.नौकरी में बदलाव होना
7.बच्चों का घर छोड़ना
8.आपका स्वास्थ्य और मूड
9.मौसम
10.पार्टनर का निधन होना या करीब न होना
11.तलाक के कारण परिवार टूट जाना
12.नशाखोरी और ड्रिंक करना
12.बुरी आदतों का शिकार होना
14.हिंसा या बुरे व्यवहार का शिकार होना

थोड़ी देर के लिए जीवन में उतार-चढ़ाव आना तो जरुरी  है लेकिन अगर ये लंबे वक्त तक बने  रहे तो ये जिंदगी से जुड़ी बाकी चीजों को भी नष्ट  कर सकती है। वैसे भी तनाव इसलिए कभी नहीं होता क्योंकि आप कमजोर हैं बल्कि हमेशा इसलिए होता है कि आप उसकी मौजूदगी होने के बाद भी टेंशन को रहने देते हैं और उसका विरोध नहीं करते  हैं।

तनाव होने पर हमेशा चीजों को सकारात्मक तरीके से देखने और सोचने  की कोशिश करनी चाहिए। कुछ मामलों में हो सकता है कि आपको Fresh Start  की भी जरुरत पड़े। लेकिन अगर आप लगातार नौकरियां, पार्टनर या घर बदल रहे हैं तो ऐसे हालात में आपको हालात नहीं बल्कि खुद को बदलने की जरुरत होती  है।

क्या हैं Stress के   चेतावनी देने वाले लक्षण (​What are the warning signs of stress ?)

अगर आपको इतना ज्यादा तनाव होता है कि संभलने का मौका तक नहीं मिल पाता है, तो ये आपके लिए खतरे की घंटी जैसा हो सकता है। इसलिए ये जानना बहुत जरुरी  है कि तनाव होने से पहले  वो कौन से  लक्षण हैं जिन्हें जानकर आप थोड़ी देर में होने वाले तनाव से पहले ही निपट सकते हैं।

टेंशन से पहले होने वाले सामान्य लक्षण इस प्रकार हैं:-

1.सामान्य से ज्यादा या कम भोजन करना।
2.तेजी से मूड बदलना।
3.आत्म-सम्मान में कमी आना।
4.हर वक्त टेंशन या बेचैनी महसूस करना।
5.ज्यादा या कम सोना।
6.कमजोर याददाश्त या भूलने की समस्या।
7.जरुरत से ज्यादा शराब या ड्रग्स लेना।
8.जरुरत से ज्यादा थकान या ऊर्जा में कमी होना।
9.परिवार और दोस्तों से दूर-दूर रहना।
10.ध्यान कें​द्रित न करना और काम में संघर्ष करना।
11.उन चीजों में भी मन न लगना जो पहले आपको पसंद थीं।
12.विचित्र अनुभव होना, उन चीजों का दिखना जो वहां हैं ही नहीं।
  इसके अलावा टेंशन के कुछ शारीरिक लक्षण भी हो सकते हैं जिनमें सिरदर्द, कब्ज या किसी खास अंग या शरीर में दर्द होना।

अपने अनुभव के बारे में कैसे बताएं? (How do I talk about how I'm feeling?)


हम सभी जानते हैं कि जब हम किसी से जुड़ाव/lagav महसूस करते हैं तो उससे बात करना हमेशा अच्छा लगता है। हम लोगों में से कुछ के लिए, सोशल मीडिया इसका सबसे अच्छा माध्यम है। लेकिन रिसर्च से पता चला कि सोशल मीडिया ही हम लोगों में से कई की जिंदगी की सबसे बड़ी मुसीबत बनकर सामने आया  है।

ये कहावत काफी पुरानी  भी है और सुनी भी सभी ने है  कि दर्द बांटने से कम होता है। लेकिन सच में  ये बात सही  है। ये लोगों को बताने के लिए नहीं है, ना ही ये साबित करने के लिए है कि आप जरुरत में हैं और किस दौर से गुजर रहे हैं। बल्कि ये उनसे समझने के लिए है कि अगर वह उस तकलीफ में होते तो क्या करते?

 कई बार जब हम टेंशन में होते हैं तो आसान से उपाय भी हमारे दिमाग में नहीं आते हैं। लेकिन दूसरे वही बात सुनकर हमें ऐसे रास्ते सुझा देते हैं जो हमारी हर मुश्किल को आसान बना देते हैं। इसलिए खुलकर संवाद करना भी बहुत जरूरी है। वैसे भी किसी से बात करना कौन सी बड़ी बात है।  इसलिए ईमानदारी से बात रखिए और दोस्तों को हर वो बात बता दीजिए जो आपको परेशान कर रही है।

घबराएं नहीं, डॉक्टर से सलाह लें 
क्या कभी आपको जुकाम, दस्त या फिर बुखार ​की समस्या हुई है? इन बीमारियों के इलाज के लिए आप जरूर ही डॉक्टर के पास भी गए होंगे। अगर हां, तो फिर टेंशन होने पर डॉक्टर के पास जाने में हिचक क्यों?

अगर आप सच में  टेंशन से उबरने में मुश्किल महसूस कर रहे हों तो बेहतर है कि बिना देर किए डॉक्टर के पास जाएं। मनोचिकित्सक सच में  बहुत धैर्य से मरीज की बात सुनते हैं और वह आपकी समस्या को औरों से बेहतर समझते हैं। उनके सामने बात रखने से वह न सिर्फ आपका सही इलाज कर सकते हैं बल्कि आपकी जिंदगी को नई राह भी दिखा सकते हैं।

टेंशन, डिप्रेशन जैसी समस्याएं भी उतनी ही आम बीमारी है जितनी कि जुकाम या बुखार होना। अगर आप उनके इलाज के लिए डॉक्टर के पास जा सकते हैं तो फिर टेंशन के इलाज के लिए क्यों नहीं? संकोच छोड़ दीजिए और डॉक्टर से इस मामले में बात कीजिए।

आशा करती हूँ कि ये जानकारी helpfull होगी |

हेल्थ से सम्बंधित अधिक लेख पढ़ने के लिए हमारी वेबसाइट पर विजिट करें :https://www.wisehealths.com/

Saturday, 8 June 2019

विटामिन डी की कमी के कारण, लक्षण और उपाय Signs & Symptoms Of Vitamin D deficiency

विटामिन डी(Vitamin D) 

विटामिन डी(Vitamin D)  वसा-घुलनशील प्रो-हार्मोन का एक समूह होता है। इसके दो प्रमुख रूप हैं: विटामिन D2 (या अर्गोकेलसीफेरोल) एवं विटामिन D3 (या कोलेकेलसीफेरोल)। त्वचा जब धूप के संपर्क में आती है तो शरीर में विटामिन D निर्माण की प्रक्रिया आरंभ होती है। यह मछलियों में भी पाया जाता है। विटामिन D की मदद से कैल्शियम को शरीर में बनाए रखने में मदद मिलती है जो हड्डियों की मजबूती के लिए आवशयक  होता है। इसके अभाव में हड्डियां कमजोर होती हैं  और टूट भी सकती हैं। 
 
विटामिन डी image 





विटामिन D हमारे  स्वास्थ्य के लिए आवशयक है। यह शरीर में कैल्शियम के स्तर को नियंत्रित  करता है, जोकि  तंत्रिका तंत्र की कार्य प्रणाली और हड्डियों की मजबूती के लिए आवशयक है। यह शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को  बढ़ाता है। विटामिन D के लक्षण एकदम उभर कर सामने नहीं आते, इसी वजह से लोगों को समय पर विटामिन D की कमी से होने वाले रोगों का पता ही नहीं चल पाता। इसलिए विटामिन D की नियमित जांच और विटामिनD युक्त भोजन लेना जरूरी है।

 शरीर को तंदुरूस्त रखने के लिए कैल्शियम और प्रोटीन की तरह विटामिन भी अहम भूमिका निभाता है। यह वसा में घुलनशील होता है और हमारी आंतों से कैल्शियम को सोखकर हड्डियों तक पहुंचाने का कार्य करता है। शरीर में इसकी कमी से कई तरह की बीमारियां होने का खतरा बना रहता है। विटामिन  की पूर्ती हाइड्रॉक्सी कोलेस्ट्रॉल(Hydroxy cholesterol) और अल्ट्रावॉयलेट किरणों (Ultraviolet rays) से होती है। इसके अलावा कुछ खाद्य पदार्थों में भी विटामिन D की भरपूर मात्रा पाई जाती है। कई बार तो बहुत से लोग यह समझ भी नहीं पाते कि शरीर में विटामिन D की कमी हो रही है। सही समय पर इसके लक्षणों को पहचान कर body में इसकी मात्रा को ठीक किया जा सकता है। 
 आइए जानें विटामिन की कमी होने पर कौन-कौन से संकेत देता है हमारा शरीर-

लक्षण

 आज हम आपको बताते  हैं कि शरीर में विटामिन D  की कमी होने पर कैसे लक्षण दिखते हैं:-

 1. हड्डियों में दर्द होना।
2. मांशपेशियों में कमजोरी महसूस होना।
3. थकान और कमजोरी महसूस होना।
4. जरुरत से ज्यादा नींद आना।
5. हमेशा डिप्रेशन में होने जैसा महसूस होना। 
6. शरीर की तुलना में सर से अधिक पसीना आना ।
7. बार-बार इन्फेक्शन होना।
8. सांस लेने में दिक्कत होना, आदि।



इन रोगों का रहता है खतरा—

त्वचा का रंग गहरा होना


त्वचा का  रंग गहरा मिलेनिन नामक पिगमेंट के कारण होता है। मिलेनन बहुत अधिक होने के कारण धूप लगने पर त्वचा में विटामिन-डी का निर्माण ठीक से नहीं हो पाता। कुछ शोधकर्ताओ  का मानना है कि बढती उम्र मे गहरे रंग की त्वचा वालों को विटामिन  D की कमी की समस्या का सामना अधिक करना पड़ता है 


डायबिटीज


डायबिटीज(मधुमेह) की बड़‌ी वजह मोटापा(obesity) है यह तो आप जानते हैं लेकिन क्या आपको यह भी पता है कि मोटापे के साथ-साथ विटामिन D की कमी भी इस रोग के लिए प्रमुख कारणों  में से एक है। डायबिटीज केयर जर्नल(Diabetes Care Journal)में प्रकाशित शोध की मानें तो अगर मोटापे और विटामिन D की समस्या किसी व्यक्ति को एकसाथ हो तो शरीर में इंसुलिन की मात्रा को असंतुलित करने वाली इस बीमारी के होने का खतरा और भी बढ़ जाता है। 


बच्चों में एनीमिया का खतरा


यदि रक्‍त में विटामिन डी का स्‍तर 30 नैनो ग्राम प्रति मिली(gm/ml ) लीटर से कम है तो ऐसे में बच्‍चे के एनीमिया ग्रस्त  होने की आशंका बनी रहती है। डॉक्टर का कहना है कि 30 नैनो ग्राम प्रति मिली लीटर से कम स्‍तर वाले बच्‍चों को सामान्‍य विटामिन D के स्‍तर वाले बच्‍चों की तुलना में दोगुना खतरा ज्‍यादा था। जिन बच्‍चों को एनीमिया होने का खतरा था उनके रक्‍त में विटामिन की मात्रा 20 नैनो ग्राम प्रति मिली लीटर पायी गई। इससे पहले भी कई अध्‍ययनों में विटामिन D और एनीमिया के बीच संबंध पाया जा चुका है। यह भी पता चला कि विटामिन Dकी कमी रेड ब्‍लड सेल के उत्‍पादन पर भी असर डालता है।
विटामिन डी image 

इन आहारों का करें सेवन

1. दूध (milk )


हमें स्वस्थ और फिट रहने के लिए दूध का सेवन प्रतिदिन करना चाहिए| दूध, विटामिन  D का बहुत ही अच्छा स्रोत है एक कप दूध से 21% तक विटामिन  D मिलती है|

2. पनीर(cheese)

वैसे तो दूध से बनी हुई हर चीजों में विटामिन  D और कैल्शियम भरपूर में पाया जाता  है इसलिए इनका सेवन हमें प्रतिदिन करना चाहिए जिनमें पनीर भी विटामिन D का एक अच्छा source है|

3. मछली(fish)

मछली में  प्रोटीन, कैल्शियम, फास्फोरस और विटामिन D भरपूर मात्रा में होता है| मछलिया  भी कई प्रकार की होती है, लेकिन salmon and tuna कुछ ऐसी मछलियां हैं जिनमें विटामिन D भरपूर मात्रा में पाया जाता है|


4.. गाजर(carrot)

विटामिन D की कमी को पूरा करने के लिए गाजर भी एक अच्छा source है| गाजर खाने से या गाजर का जूस पीने से शरीर में खून की कमी की पूर्ति होती है| गाजर खून की कमी को भी पूरा करता है क्योंकि इसके अंदर विटामिन A  और विटामिन B भी होते हैं| इसलिए प्रतिदिन गाजर का सेवन करना चाहिए| आप इसे कच्चा खा सकते हैं या फिर  जूस निकाल कर  पी सकते हैं|

5. अंडा(Egg)

अंडा, प्रोटीन, कैल्शियम, और विटामिन डी का एक अच्छा स्रोत है| अंडे का सफेद भाग प्रोटीन से भरपूर होता है और इस का पीला भाग विटामिन D और वसा(fat) से भरपूर होता है| विटामिन D की कमी को पूरा करने के लिए अपने खाने में अंडे का भी  इस्तेमाल कर सकते हैं|

6. मशरूम(mushroom)

मशरूम, विटामिन का बहुत ही अच्छा स्रोत है| मशरूम के अंदर विटामिन D के साथ-साथ और भी पोषक तत्व मौजूद होते हैं जो स्वास्थ्य के लिए लाभदायक होते हैं| इसके अंदर कैलोरी बहुत कम होती है लेकिन vitamin  का यह एक अच्छा स्त्रोत  है|


7 . अनाज(Grain)

अनाज(गेहूं, चावल, बाजरा, मकई इत्यादि) में भरपूर मात्रा में विटामिन के साथ-साथ अन्य पोषक तत्व मौजूद होते हैं| अनाज का सेवन तो हम अपने खाने में करते ही हैं जिसके माध्यम से हमें विटामिन D का कुछ अंश हर रोज  मिलता रहता है|

8 . दलिया(Oatmeal)
दलिया, गेहूं से ही बनता है| दलिया खाने से विटामिन D की कमी पूर्ति होती है| आजकल यहबाजार में आसानी से मिल जाता है, जिसे आप खरीद कर  भी बना सकते हैं|

9 . मक्खन(butter)

मक्खन भी दूध से बना हुआ एक product है जो खाने में भी बहुत स्वादिष्ट होता है| लेकिन मक्खन के अंदर saturated fats(संतृप्त वसा) भी होती है| इसलिए ज्यादा मक्खन खाने से शरीर में fat भी बढ़ सकता है| यदि संतुलित रुप से मक्खन को भोजन में सम्मिलित किया जाए तो यह विटामिन D और अन्य पोषक तत्वों का अच्छा स्रोत है| 

कई बार धूप में बैठने पर भी विटामिन D की कमी पूरी हो जाती है ध्यान रहे की तेज धूप में न बैठे
सुबह निकलती हुई धूप में बैठे , क्योकि तेज धूप स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है | 

हेल्थ से सम्बंधित अधिक लेख पढ़ने के लिये हमारी वेबसाइट पर विजिट करें -https://www.wisehealths.com/blogs.php

Tuesday, 4 June 2019

गर्मियों में आपको तंदुरुस्त रखते है ये फल- आम, खरबूजा , तरबूज , ककड़ी आदि ।



      गर्मियां शुरू(Start ) हो गईं हैं और जरूरी है कि हमे  अपने खान-पान पर  पूरा ध्यान देंना चाहिए  ,गर्मियों में ऐसा खान-पान होना चाहिए  जो  कि शरीर को ठंडा रखे। गर्मी का मौसम(season ) चाहे कितना भी  परेशान करने वाला और  तपाने वाला  क्यों न हो , लेकिन मौसमी फलों की मौजूदगी इसका एहसास नहीं होने देती ।

आओ  जानते है  गर्मी के मौसम(season ) में आने वाले उन सभी  फलों के बारे में , जो गर्मी के मौसम  में रखते हैं हमारी सेहत का  ध्यान और हमें रखते है स्फूर्ति से भरपूर :-


 फलों का राजा है  आम
     यह बात तो सब  लोग अच्छे से जानते ही  है कि आम, फलों का राजा कहलाता  है। विश्व (world ) के अनेक देशों में आम की अलग-अलग जाति(किस्म) होती है।  भारत  का प्रसिद्ध फल आम  है। अगर  स्वाद, स्वास्थ्य एवं बल संवर्धन(healthy) की दृष्टि से देखा जाये तो  आम सभी फलों में सबसे  आगे है। आम को खाने से पहले 2-3 घण्टे   पानी में भिगो कर  रखे ।आम में पाए जाने वाले एस्कॉर्बिक एसिड, टर्पेनॉयड , कैरोटीनॉयड, पॉलीफिनॉल स्वास्थ्य के लिये फायदेमंद होते है।

  खरबूजा
    यह ग्रीष्म ऋतु का सबसे famous  fruit  होता है। यह हर कहीं easily  मिल जाता है एवं सस्ता होने के कारण सभी खरीद भी  सकते हैं। यह तृप्ति कारक, शीतल, बलवर्धक तथा पित्त, वायु और कब्ज निवारक होता  है और यदि शारीरिक श्रम(physical effort) के बाद खरबूजा  खाते है तो थकान दूर हो जाती है तथा तृप्ति(प्यास से शांति ) मिलती है क्योकि इसमें विटामिन A ,B,C  मैग्नीशियम, सोडियम और पोटेशियम होता है। खरबूजे के बीज छाती में जमे कफ को निकालने में बहुत फायदेमंद होते हैं। खरबूजा में प्रोटीन अधिक मात्रा पाया जाता है इसलिए खरबूजा हड्डियों, बालों और नाखूनों के लिए फायदेमंद(Usefull ) होता है।खरबूजा शरीर में पानी की कमी होने से बचाता हैऔर शरीर को हाड्रेट रखता है ।


 पानी का खजाना  है तरबूज
   तरबूज में लाइकोपिन (Lycopene) नामक पदार्थ  पाया जाता है जो त्वचा(skin ) की चमक को बरकरार रखने में मदद करता है । हृदय(Heart ) संबंधी बीमारियों को रोकने में भी तरबूज एक रामबाण ओषधि (Medicine ))   है। तरबूज में विटामिन  की प्रचुर मात्रा होने के कारण ये शरीर के इम्यून सिस्टम को  सही  रखता है।  विटामिन A  आंखों के लिए अच्छा है जोकि तरबूज में प्रचुर मात्रा में पाया जाता है  । तरबूज खाने से Mind Fresh  रहता है और गुस्सा भी  कम आता है, क्योंकि तरबूज की तासीर ठंडी होती है और इसमें 75 % पानी होता  है। तरबूज का  गूदा जितना भी लाल होगा उतना ही मीठा एवम रसभरा होगा। तरबूज  वास्तव में  गर्मियों  का एक  मजेदार फल है।

अनुपम ककड़ी
    यह गर्मियों  का  फल तथा सब्जी दोनों है क्योंकि  यह अपने शीतल प्रभाव से मन, मस्तिष्क(Mind ) तथा वायु कोशिकाओं को तृप्ति(शांति ) एवं स्वास्थ्य प्रदान करती है। यह गर्मी तथा लू से बचाती है और त्वचा को खूबसूरत बनाने में भी सहायक होती  है। खीरा तथा  ककड़ी के गुणधर्म लगभग  एक समान(eqaul )  से होते है।

  रसीली लीची
   लीची गर्मी में शरीर का  तापमान(Temperature) नियंत्रित रखने में मदद करती है, और साथ ही  शरीर को  पोषण भी प्रदान करती है। यह आंखों और त्वचा के लिए बेहद फायदेमंद  है,क्योंकि  इसमें मौजूद एंटीऑक्सीडेंट तत्व तनाव(dipression ) और झुर्रियों(damage skin cells ) से  बचाते हैं।

 अंगूर
   अंगूर में पर्याप्त मात्रा में कैलोरी, फाइबर और विटामिन C ,विटामिन A  पाया जाता है। अंगूर के लाजवाब स्वाद से तो हम सभी परिचित हैं लेकिन कम  लोगों को ही  पता होता है कि  गर्मियों में अंगूर सेहत के लिए बहुत जरुरी  भी होता  है। इनमें  भ्रपूर मात्रा  में एंटीऑक्सीडेंट होते हैं, जो  तनाव(dipression ) और बढ़ती उम्र  में होने झुर्रियों से बचाते हैं। अंगूर खाने के बाद  प्यास भी कम  लगती क्योंकि  इसमें अधिक मात्रा में पानी ही  होता है।

  फाइबर से भरपूर पपीता
  पपीता हर मौसम में आसानी से मिल जाता है। पपीता खाने से पेट की समस्याएं दूर होती है क्योंकि पपीते  में पोषक तत्व  भरपूर मात्रा में पाये जाते हैं । पपीते में पर्याप्त मात्रा में बीटा कैरोटीन, विटामिन,पौटैशियमऔर  फाइबर  पाया जाता है। । पपीते में मौजूद विटामिन A  से आंखों की रोशनी सही रहती है। पपीते के सेवन से रक्त साफ रहता है, महिलाओं के लिए यह अच्छा फल है। सुंदर चमचमाती त्वचा के लिए पपीता जरूर खाये ।

ऐसे ही हेल्थ से सम्बंधित अधिक लेख पढ़ने के लिए हमारी वेबसाइट पर विजिट करें :-
https://www.wisehealths.com/blogs.php

बदलते मौसम कई बीमारियों को जन्म देता है। इस मौसम में सर्दी, जुकाम, खांसी तो आम बात है, लेकिन इनके अलावा ब्रेनस्ट्रोक, ...