Monday, 2 December 2019






Winter Care Tips: सर्दी में बदलें स्किन केयर रूटीन, यूं रखें त्वचा का ख्याल



बदलते मौसम कई बीमारियों को जन्म देता है। इस मौसम में सर्दी, जुकाम, खांसी तो आम बात है, लेकिन इनके अलावा ब्रेनस्ट्रोक, डाइबिटीज, हाईब्लड प्रेशर और दमा के मरीजों के लिए सर्दी और भी बड़ी मुसीबत बन सकती है।

सर्दियों में शुष्क हवा के कारण त्वचा रूखी और बेजान हो जाती है। ऐसे में सेहत के साथ-साथ त्वचा का ध्यान रखना भी जरुरी है । इस मौसम में त्वचा को हाइड्रेट(Hydrate) व मॉइस्चराइज्ड (Moisturize) रखना  जरूरती  होता  है, नहीं तो त्वचा को कई समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। आज हम आपको यही बताएंगे कि बदलते मौसम के साथ आपको अपनी स्किन(Skin ) की केयर किस तरह करनी चाहिए, ताकि त्वचा सर्दियों में होनी वाली समस्याओं से बची रहे।





सर्दियों में बदले स्किन केयरिंग  का तरीका


क्रीम बेस्ड क्लींजर का इस्तेमाल करें 

सर्दियों में शुष्क और ठंडी हवाएं त्वचा की नमी खींच लेती है। ऐसे में क्रीम बेस्ड क्लींजर का इस्तेमाल त्वचा के लिए बेहतर ऑप्शन है। यह ना सिर्फ त्वचा को नमी देता बल्कि इससे स्किन पोर्स भी साफ हो जाते हैं। साथ ही इससे स्किन तरोताजा भी रहती है।


मॉइश्चराइजर का इस्तेमाल करें 

इस मौसम में त्वचा को हाइड्रेट रखने के लिए जरूरी है कि आप मॉइश्चराइजर का इस्तेमाल रोजाना करें । इससे आपकी  स्किन में नमी बनी रहती है, और  आप सर्दियों में होने वाली स्किन प्रॉब्लम्स से बचे रहते हैं।

रेगुलर करें फेशियल स्क्रब

बदलते मौसम के साथ जब नई त्वचा आती है तो वह ज्यादा ग्लो करती हैं और डेड सेल्स को रिपेयर करने में भी मदद करती है। ऐसे में स्किन को स्मूद बनाने के लिए टाइम-टू-टाइम फेशियल स्क्रब करते रहें।

स्किन टाइप के हिसाब से यूज करें प्रोडक्ट्स

सर्दियों में किसी भी चीज का इस्तेमाल करने से पहले अपनी स्किन टाइप भी जान लें। आप चाहें तो इसके लिए डर्मेटोलॉजिस्ट से भी संपर्क कर सकती हैं।

सही और संतुलित आहार भी है जरूरी

इस मौसम में आपको ऐसी चीजों का सेवन करना चाहिए, जिससे त्वचा में पानी की कमी पूरी हो। इसके अलावा अपनी डाइट में ओमेगा 3 व 6, विटामिन्स और मिनरल्स से भरपूर चीजें भी लें। साथ ही अपनी डाइट में मछली, नट्स, ऑलिव ऑयल, अलसी के बीज और एवोकाडो को शामिल करें।

नर्म व मुलायम होंठों के लिए

सर्दियों में होंठ भी रूखे होकर फटने लगते हैं इसलिए इनका ध्यान रखना भी जरुरी है । इसके अलावा रात को सोने से पहले अपने होंठों पर मलाई या नारियल तेल जरूर लगाएं, इससे होंठों पर नमी बनी रहेगी और फटेंगे भी  नहीं।

गुनगुने पानी से  स्नान करें

अक्सर लोग इस मौसम में गर्म पानी से नहाना पसंद करते हैं लेकिन इससे त्वचा को नुकसान पहुंचता है। ऐसे में बेहतर होगा कि आप नहाने के लिए गुनगुने पानी का इस्तेमाल करें। आप चाहे तो नहाने वाले पानी में कच्चा दूध भी मिला सकते हैं। इससे त्वचा कोमल रहती है।

खूब  पानी पीएं

सर्दी हो या गर्मी, खूब पानी पीएं, ताकि त्वचा नमीयुक्त और हाइड्रेट रहे। त्वचा में पानी पर्याप्त मात्रा में होगा तो सेल्स डेड नहीं होंगे और स्किन ग्लो करेगी।

रूखे-सूखे हाथों के लिए

हाथों की स्किन अगर काफी रूखी है तो इसके लिए या तो नींबू और चीनी को घोलकर उसे हाथों पर लगाएं। फिर थोड़ी देर बाद हाथों को गुनगुने पानी से साफ करें। इसके अलावा शहद और नींबू को मिलाकर लगने से भी फायदा होगा।

पैरों का भी रखें ध्यान

सर्दियों में एड़ियां ज्यादा ड्राई हो जाती हैं और कई बार तो फटने भी लगती है। ऐसे में अगर प्रॉपर साफ-सफाई न की जाए तो पैरों की खूबसूरती छिन जाती है। पैरों की सफाई डिटॉल मिले गुनगुने पानी से करें। मॉइस्चराइजर के प्रयोग के बाद भी अगर पैर की त्वचा खुश्क रहती है तो आप मेनीक्योर और पेडीक्योर का सहारा ले सकती हैं। 

इन बातों का भी रखें ख्याल

-सर्दियों में त्वचा को कोमल बनाए रखने के लिए बादाम के तेल का इस्तेमाल करना बहुत फायदेमंद होता है।
-इस मौसम में साबुन का इस्तेमाल करने से बेहतर है कि सरसों के उबटन का इस्तेमाल करें।
-बाजार में बिकने वाले स्क्रब के स्थान पर चीनी के स्क्रब का इस्तेमाल करें। इससे डेड स्‍क‍िन भी साफ हो जाएगी और चेहरे का मॉइश्चर भी बना रहेगा।
-नहाने के बाद हल्के हाथों से तौलिए का इस्तेमाल करें। संभव हो तो नहाने के तुरंत बाद नारियल के तेल से या किसी ऑयली बॉडी लोशन से पूरे शरीर पर मसाज करें।
-चेहरा धोने के लिए न तो बहुत अधिक गर्म पानी का इस्तेमाल करें और न ही बहुत ठंडा।

बुजुर्गों के लिए इसलिए खतरनाक होती हैं सर्दियां 

सर्दियों में शरीर का लगातार तापमान गिरने लगता है, जिसके कारण हाइपोथर्मिया के होने का खतरा बढ़ जाता है। यह समस्या ख़ासकर बूढ़े लोगों में ज्यादा होती है। इस समय खास ध्यान रखकर इससे बचा जा सकता है।  फिजीशियन  बताते हैं, “जब शरीर का तापमान 97 डिग्री फारेनहाइट से कम हो जाता है। सर्दियों के मौसम में जब बाहर का तापमान कम होता और शरीर में गर्मी पैदा नहीं हो पाती है, उस समय ऐसा होता है। शरीर जितनी तेजी से गर्मी पैदा कर सकता है, उससे कहीं ज़्यादा तेजी से वह गर्मी खत्म कर सकता है। ऐसे में लोग हाइपोथर्मिया का शिकार होते हैं, जो उनके लिए जानलेवा हो सकता है।”

सर्दियों में तापमान कम होने पर उम्रदराज और बच्चे इसके ज़्यादा खतरे में होते हैं। ऐसे मौसम में शरीर को जितनी गर्मी की आवश्यकता होती है, उतनी वह बना नहीं पाता है। हाईपोथर्मिया के सबसे अधिक शिकार बच्चे या वृद्ध होते हैं। ग्रामीण क्षेत्र में अधिकतर शिशुओं की मृत्यु जन्म लेते ही हो जाती है। बच्चा मां के गर्भ में रहता है तब उसका तापमान कुछ ओर रहता है लेकिन जन्म के बाद तापमान में बदल जाता है। इस समय ही बच्चों को ठंड लगती है और या तो वह निमोनिया का शिकार हो जाता है, या थोड़ी ही देर में दम तोड़ देता है। आंकड़ों के अनुसार, हाइपोथर्मिया से होने वाली करीब 50 प्रतिशत मौत 65 वर्ष या उससे अधिक उम्र के लोगों में होती हैं। वृद्धों को कम उम्र के लोगों की तुलना में हाइपोथर्मिया से पीड़ित होने की आशंका सबसे अधिक होती है, क्योंकि ठंड से बचाव की शरीर की प्रणाली उम्र बढ़ने के साथ कमजोर होती जाती है। इसके अलावा उम्र बढ़ने के साथ सबक्युटेनियस वसा में कमी आ जाती है और ठंड को महसूस करने की क्षमता भी घट जाती है। उम्रदराज लोगों में डायबिटीज़ आदि बीमारियों की वज़ह से उनका शरीर ठंड को झेल पाने में कम सक्षम होता है। सीधे दवा विक्रेता से दवा लेकर सर्दी-जुकाम का इलाज करना भी इसका कारण बन सकता है।


क्या हैं लक्षण

                 हाइपोथर्मिया के धीमी, रुकती आवाज, आलस्य, कदमों में लड़खड़ाहट, हृदयगति और सांस और ब्लड प्रेशर बढ़ना लक्षण हैं। इससे युवाओं और बुजुर्गों को, खासकर जिनको मधुमेह या इससे जुड़ी बीमारियां हैं या जो मदिरापान या ड्रग का प्रयोग ज्यादा करते हैं, उन्हें होता है।

 कैसे बचाव करें 

प्राथमिक उपचार के तौर पर मरीज को सबसे पहले बंद गर्म कमरे में लेटा दें, उसके गीले कपड़े उतार दें, गर्म कपड़ों की परतें उन्हें पहना दें, इसके बाद गर्म कम्प्रैस या इंसुलेशन का प्रयोग करें। ध्यान रहे आपको ऐसे में सीधे हीट का प्रयोग नही करना है। टांगों और कंधों को गर्म रखने के लिए कंबल का प्रयोग करें और घर के अंदर सिर पर हैट या टोपी पहन कर रखें। ठंड में बाहर जाते समय, टोपी, स्कार्फ और दस्ताने ज़रूर पहनें, ताकि शरीर की गर्मी कम न हो। सिर को ढकना बेहद आवश्यक है, क्योंकि ज़्यादातर गर्मी सिर के जरिए बाहर जा सकती है। गर्मी को शरीर के अंदर बनाए रखने के लिए गर्म ढीले कपड़ों की कई परतें पहन कर रखें।



सर्दियों का मौसम आपको कई बीमारियों के करीब पहुंचा सकता है। अनेक बीमारियां इस मौसम में हमारे आसपास मंडराती रहती हैं। इनसे आप खुद को कैसे बचाए रख सकते हैं, बता रहे हैं एनडीएमसी के मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉं. अनिल बंसल

सर्दी, जुकाम, बुखार, त्वचा आदि समस्याएं सर्दियों के मौसम में आम होती हैं। जो लोग समय पर इन बातों का ध्यान रखते हैं और मौसम के अनुरूप अपना खयाल रखते हैं, उन्हें तो सर्दी की ये बीमारियां छू भी नहीं पातीं, लेकिन जो लोग बदलते मौसम में शरीर की जरूरतों का बिल्कुल ध्यान नहीं रखते, उन्हें कई बीमारियां अपनी चपेट में लेने को आतुर रहती हैं। ऐसे में क्यों न सावधानी बरतकर स्वस्थ रहा जाए।

सर्दी-जुकाम
इसे कॉमन कोल्ड भी कहते हैं, जो तापमान में परिवर्तन के कारण होता है। जिन लोगों की रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होती है, उन्हें यह जल्दी पकड़ता है। संक्रमण वाली इस बीमारी के वारयस से बचने के लिए साफ-सफाई का खास ध्यान रखना होता है। बार-बार हाथ को साबुन से धोते रहना चाहिए, ताकि संक्रमण से बचे रह सकें। यह वायरल इंफेक्शन है, इस कारण इसमें एंटीबायटिक की जरूरत नहीं होती और यह 5 से 7 दिन में खुद ही ठीक हो जाता है। इसमें एंटी एलर्जिक दवा दी जाती है, ताकि मरीज को आराम मिले। इसमें भाप, नमक के पानी के गरारे आदि काफी लाभदायक हैं। इसमें गर्म तरल पदार्थ का ज्यादा प्रयोग करना चाहिए। तुरंत गर्म से ठंडे में और ठंडे से गर्म में न जाएं, अन्यथा इससे इस संक्रमण की गिरफ्त में आ सकते हैं।

हाइपोथर्मिया
सर्दियों में अगर शरीर का ताप 34-35 डिग्री से नीचे चला जाए तो उसे हाइपोथर्मिया कहते हैं। इसमें हाथ-पैर ठंडे हो जाते हैं, सांस लेने में तकलीफ होती है। हार्ट बीट बढम् जाती है, बीपी कम हो जाता है। अगर शरीर का तापमान कम हो जाए तो मृत्यु भी हो सकती है। तेज ठंड का सामना न करें।

टॉन्सिलाइटिस
बच्चों में पाई जाने वाली यह आम समस्या भी टॉन्सिल में संक्रमण के कारण होती है। गले में काफी दर्द होता है। खाना खाने में दिक्कत होती है, तेज बुखार भी हो सकता है। यह बैक्टीरियल या वायरल संक्रमण से हो सकता है।  इससे बचे रहने के लिए इस मौसम में ठंडी चीजों का प्रयोग करने से बचें। गर्म भोजन और गुनगुने पानी का प्रयोग करें।

अस्थमा
यह एक एलर्जिक बीमारी है। जिन लोगों को यह बीमारी होती है, इस मौसम में उनकी तकलीफ बढ़ जाती है। सर्दियों में कोहरा बढ़ जाता है। एलर्जी के तत्व इस मौसम में कोहरे की वजह से आसपास ही रहते हैं, हवा में उड़ते नहीं हैं। इन तत्वों से अस्थमा के रोगियों को अधिक तकलीफ होती है। इस कारण इस मौसम में ऐसे लोगों के लिए धूल-मिट्टी से बचना बहुत जरूरी है। दवा खा रहे हैं तो उसे नियमित रूप से लें। कोई दवा चूकें नहीं, क्योंकि ऐसे में एलर्जेट अटैक कर सकते हैं।

बेल्स पाल्सी
इसे फेसियल पेरालिसिस कहते हैं। यह सर्दियों में बड़ा सामान्य है। इसमें मुंह टेड़ा हो सकता है, आंख खराब हो सकती है। कान के पास से सेवेंथ क्रेनियल नस गुजरती है, जो तेज ठंड होने पर सिकुड़ जाती है। इसकी वजह से यह बीमारी होती है। इसमें मुंह टेड़ा हो जाता है, मुंह से झाग निकलने लगता है, बोलने में जबान लड़खड़ाने लगती है और आंख से पानी आने लगता है। अगर आप लंबे समय तक ठंड में हैं तो कान की उस नस को नुकसान हो सकता है। खासकर ड्राइविंग करने वालों, रात में बिना सिर को ढके कहीं जाने वालों में इसका खतरा बढ़ जाता है, इसलिए मफलर का प्रयोग करें, गाड़ी के शीशे बंद रखें।

रूखी त्वचा
सर्दियों में अधिक कपड़े पहनने से शरीर को मॉइश्चर नहीं मिलता, जिससे त्वचा ड्राइ हो जाती है। इससे वे फटने लगती हैं। त्वचा को ड्राइ होने से बचाने के लिए मॉइश्चराइजर जरूर लगाएं। त्वचा को ड्राइनेस से बचाने के लिए मलाई या तेल का भी प्रयोग कर सकते हैं। होठों में भी यह समस्या आती है, इस मौसम में। इसके लिए घरेलू दवाएं या अपने डॉक्टर से सलाह लेकर दवा ले सकते हैं।

Sunday, 20 October 2019

सर्दियाँ आ चुकी हैं. और ठण्ड के साथ दस्तक देने वाली हैं ढेर सारी परेशानियाँ. जरा सी लापरवाही और समस्या शुरू. इसलिए हम आपके लिए लेकर आये हैं इस सर्दी ठण्ड से जुड़ी परेशानियों से खुद को बचाने के लिए कुछ जरुरी टिप्स.


बदलते मौसम कई बीमारियों को जन्म देता है। इस मौसम में सर्दी, जुकाम, खांसी तो आम बात है, लेकिन इनके अलावा ब्रेनस्ट्रोक, डाइबिटीज, हाईब्लड प्रेशर और दमा के मरीजों के लिए सर्दी और भी बड़ी मुसीबत बन सकती है।
  सर्दी के आते हैं लोग गर्मी और बारिश के खत्म होने की खुशी महसूस करते हैं, साथ ही ठंड के मौसम की चीजों (गर्मागर्म सूप, पकौड़े और चाय आदि) का लुत्फ उठाने की खुशी चेहरे पर चमक ले आती है, लेकिन ठंड के साथ कई सारी मौसमी बीमारियां भी दस्तक देती हैं, जिन्हें आम बोलचाल में वायरल इंफेक्शन भी कहा जाता है। अगर आप भी सर्दी की बीमारियों से बचना चाहते हैं, तो आज हम ठंड से होने वाली बीमारियों और उसके लक्षण, उपचार के बारे में बता रहे हैं।

सर्दी के मौसम में बच्चे हो या बड़े सभी का खास ख्याल रखना बेहद जरुरी होता है, क्योंकि मौसम में ठंडक होने के पर इंफेक्शन वाली बीमारियां तेजी से फैलती हैं। जिसका सबसे ज्यादा असर छोटे बच्चों, गर्भवती महिलाओं और बुजुर्गों पर होता है। ऐसे में सर्दी की बीमारियों और उसके उपचार के बारे में पूरी जानकारी होना बहुत जरुरी है, इसलिए हम आपको सर्दी की वजह से होने वाली बीमारियों और उसके असर से बचने के उपाय बता रहे हैं। आइए जानते हैं ठंड के रोगों से बचने के उपाय...//////...

1. सर्दी-जुकाम होना / Cold सर्दी के मौसम की शुरुआत होते ही अधिकांश लोगों को सर्दी-जुकाम होने की समस्या परेशान करने लगती है। कई बार सर्दी और जुकाम इंफेक्शन की वजह से भी होता है। ये छोटे बच्चों और बड़े सभी लोगों को होती है।

लक्षण : जुकाम बहना, नाक का बंद होना,बार-बार छींक आना,गले में खराश या दर्द होना, तेज सिरदर्द होना। उपचार - 1. सर्दी-जुकाम से जल्द आराम के लिए डॉक्टर की सलाह से दवा लें। 2. काले भुने हुए चनों को घी में भूनकर काला नमक डालकर खाने से लाभ मिलता है। 3. सर्दियों में मुनक्कों में काली मिर्च को रखकर हल्का गर्म करें और सेवन करें, कुछ दिनों में राहत मिलेगी। 4. हमेशा गर्म पानी का सेवन करें । 5. जुकाम को ठीक करने का सबसे असरदार तरीका है भाप लेना, ये सीने में जमा कफ को खत्म करने में भी फायदेमंद होता है।

2. इंफ्लुएंजा या फ्लू (तेज बुखार आना) / Fever इंफ्लुएंजा या फ्लू, सर्दी में इंफेक्शन की वजह से होने वाली सबसे कॉमन बीमारी है। एक-दो दिन से ज्यादा रहने इसे नजरअंदाज न करें और डॉक्टर की सलाह तुरंत लें।

लक्षण : तेज बुखार, हाथ पैरों की मांसपेशियों में दर्द होना,सिरदर्द होना, बार-बार गला सूखना, गले में दर्द होना, ठंड लगना आदि। उपचार 1. इंफ्लुएंजा या फ्लू होने पर तुरंत डॉक्टर की सलाह लें। 2. फ्लू से निजात पाने के लिए आयुर्वेदिक और घरेलू उपचार भी बेहद असरदार होते हैं। 3. पौष्टिक आहार और तरल आहार का सेवन करें। 4. गिलोय, तुलसी और पपीते के पत्तों को पानी के साथ आधा रह जाने तक उबालें और उसे ठंडा होने पर सेवन कर लें।


3 . गले में खराश या दर्द होना (Throat Pain) सर्दी के आते ही गले में खराश यानि खुजली महसूस होती है, इसके साथ गले में दर्द भी लोगों को बेहद परेशान करता है। कई बार दर्द इतना ज्यादा बढ़ जाता है कि खाना खाने में भी लोगों को दिक्कत महसूस होती है। गले में दर्द ठंडी चीजों का सेवन करने से भी होता है। लक्षण : गले में खराश होना,गले में दर्द होना, खाना खाने में दिक्कत होना,गले में सूजन होने की समस्या आदि। उपचार 1. सर्दियों में गले के दर्द से छुटकारा पाने के लिए दिन में 2-3 बार नमक वाले गर्म पानी से गरारे करें। 2. ठंडी चीजों को खाने से बचें। 3. गर्म चीजों यानि सूप, काढ़े आदि का सेवन करें। 4. अदरक के रस में शहद मिलाकर चाटें या लौंग का सेवन करें। 5. अदरक,लौंग,काली मिर्च और तुलसी की चाय का सेवन करें या काढ़ा बनाकर पीएं।

4. निमोनिया (Pneumonia) सर्दी के मौसम में छोटे बच्चों को सबसे ज्यादा होने वाली बीमारियों में से एक है निमोनिया। निमोनिया में फेफड़ों में सूजन आती है। ये बीमारी इंफेक्शन की वजह से होती है। निमोनिया का पता चलने पर डॉक्टर से तुरंत इलाज करवाना चाहिए, वरना ये जानलेवा भी साबित हो सकता है। लक्षण : निमोनिया में पीड़ित के फेफड़े में सूजन आती है, जिसकी वजह से सांस लेने में दिक्कत होती है। इसके अलावा तेज बुखार आना, शरीर में कंपन होना सामान्य लक्षण होते हैं। उपचार 1. निमोनिया का पता चलने पर सबसे पहले डॉक्टर की सलाह पर दवा लें या अस्पताल में एडमिट हों। 2. हल्दी को पानी में मिलाकर सीने पर लगाएं, इससे धीरे-धीरे इंफेक्शन में कमी आएगी और राहत मिलेगी। 3. एक गिलास पानी में 5-6 लौंग को उबालकर आधा रह जाने पर पीड़ित को देने से आराम मिलेगा। 4. पुदीने के पत्तों के रस में शहद मिलाकर दिन में 2 बार लेने से निमोनिया में आराम मिलता है। 5. तुलसी के पत्तों के रस में काली मिर्च मिलाकर दिन में 2 बार लेना फायदेमंद होता है।

5. अस्थमा (Asthma) अस्थमा धूल, मिट्टी और धुएं की एलर्जी से होने वाली बीमारी है। सर्दियों में लोगों को कोहरा और ठंड बढ़ने पर सांस लेने में बेहद तकलीफ का सामना करना पड़ता है। अस्थमा अटैक से बचने के लिए लोगों को अपने पास हमेशा इनहेलर रखने की सलाह दी जाती है। लक्षण - सांस लेने में तकलीफ होना, सांस फूलना, सीने में जकड़न होना, बार-बार खांसी आना, बैचेनी और घबराहट होना। उपचार 1.धूल, मिट्टी, धुएं और प्रदूषण से बचने के लिए हमेशा चेहरा ढककर रखें। 2. ताजा पेंट वाली जगह, कीटनाशक, स्प्रे, खुशबूदार इत्र,मच्छर भगाने की कॉइल के धुएं से दूर रहें। 3. प्रिजर्वेटिव वाले फूड और कोल्ड ड्रिंक्स जैसे ठंडी चीजों का सेवन करने से बचें।










Thursday, 17 October 2019

इन दिनों शुष्क हवा सबसे पहले त्वचा की नमी को नष्ट करती है। इससे त्वचा में खिंचाव और रूखापन पैदा हो जाता है। इसका असर आपके चेहरे पर ही नहीं, शरीर के अन्य हिस्सों पर भी होता है। इस मौसम में इस बात का खास ध्यान रखें कि आप अपनी त्वचा के प्रति लापरवाह न हो जाएं। सर्दियों में भी त्वचा को सेहतमंद बनाने के लिए क्लीनिंग आदि जरूरी है। कैसे करें सर्दियों में त्वचा की सेहत की देखभाल, क्या-क्या बरतें सावधानी, बता रही हैं नीलम शुक्ला
वीएलसीसी (इंडिया एंड ओवरसीज) के डर्मेटोलॉजिस्ट व लेजर हेड ट्रांसप्लांट एंड मेडिकल सर्विसेज विभाग के प्रमुख डॉ. र्दंतदरजीर्त ंसह तुल्ला कहते हैं कि आज के तनाव भरे वातावरण में चमकता चेहरा पाना थोड़ा मुश्किल सा लगता है। सर्दियों में त्वचा का रूखा होना और फिर उस रूखी त्वचा में खुजली होना बहुत आम समस्या है। शुष्क हवा अकसर त्वचा की नमी सोख लेती है, जिस कारण त्वचा का फटना और जलन जैसी समस्याएं होने लगती हैं। सर्दियों में स्र्केंलग, त्वचा पर पपड़ी बनकर निकलना और खुजली जैसी समस्याओं से बचने के लिए अपनी त्वचा का विशेष ध्यान रखें। माइल्ड साबुन और मॉइस्चराइजर का इस्तेमाल कर आप शुष्कता से काफी हद तक दूर रह सकते हैं। जिन लोगों की त्वचा बेहद संवेदनशील होती है, उन्हें ऐसा मॉइस्चराइजर इस्तेमाल करना चाहिए, जिसमें खुशबू ना हो।
बचें सूर्य की किरणों से
इस मौसम में धूप बड़ी अच्छी लगती है। पर याद रहे, इस मौसम में भी त्वचा के लिए सबसे ज्यादा हानिकारक सूर्य की अल्ट्रावायलेट किरणें ही हैं। इससे बचने के लिए धूप में ज्यादा देर न बैठें। वैसे भी त्वचा की दृष्टि से सनर्बांथग करना गलत है। कैंसर के खतरे के साथ ही ये अल्ट्रावायलेट किरणें आपकी त्वचा की कोशिकाओं और रुधिर वाहिनियों को कमजोर बनाती हैं। जहां तक विटामिन डी की पूर्ति के लिए धूप सेंकने की बात है तो यह काम सुबह के समय ही करें। सुबह की धूप सेंकने के बाद धूप में जब भी जाएं, सनस्क्रीन लोशन या क्रीम लगाकर जाएं। ध्यान रखें कि इसके लिए मॉइस्चराइजर एसपीएफ 30 वाला ही हो।

गुनगुने पानी का इस्तेमाल करें
सर्दियों में गर्म पानी का इस्तेमाल करने से त्वचा रूखी हो जाती है। इससे बचने के लिए गुनगुने पानी का इस्तेमाल करें, जिससे त्वचा से आवश्यक प्राकृतिक तेल न निकले। सर्दियों में साबुन का प्रयोग कम से कम करें। त्वचा अगर रूखी है तो स्क्रब करना भी बंद कर दें, क्योंकि इससे त्वचा पर मौजूद पोर तो खुल जाएंगे, लेकिन त्वचा और भी रूखी हो जाएगी। स्क्रब तभी करें, जब त्वचा तैलीय हो, ताकि इससे त्वचा का तेल कम हो सके।

मॉइस्चराइज 
नहाने या  चेहरे को धोने के तुरंत बाद मॉइस्चराइजर का उपयोग करें। इससे त्वचा रूखी नहीं होगी। दिन के समर्य ंजक ऑक्साइड मॉइस्चराइजर लगाएं, जो एसपीएफ 30 हो। साथ ही रात के लिए विटामिन ए और दिन के लिए विटामिन सी और ई युक्त मॉइस्चराइजर वाली क्रीम फायदेमंद होती है। वॉटर बेस क्रीम और मॉइस्चराइजर लगाएं। प्राकृतिक मॉइस्चराइजर का उपयोग करें, जो आपकी त्वचा को रूखी होने से बचाने के साथ-साथ इसे जरूरी आवश्यक तत्व भी देते हैं। ग्लिसरीन और गुलाब जल मिलाकर चेहरे, नाक और होठों की मसाज करने से फायदा होता है। इसका प्रयोग रात में सोने से पहले कुहनी, एड़ियों, हाथों तथा तलवों पर करें। इससे आपकी त्वचा स्वस्थ रहेगी और उसमें नमी भी बनी रहेगी, जो उसे त्वचा से संबंधित बीमारियों से दूर रखेगी।


त्वचा के लिए ये खाएं 

इस मौसम में आपके खाने की क्वॉलिटी भी आपकी त्वचा की क्वॉलिटी पर निर्भर करती है। इस मौसम में फ्राइड और मीठी चीजें खाना अच्छा लगता है, लेकिन अगर आप फिट रहना चाहते हैं तो रोस्टेड चीजें ज्यादा खाएं। फिश, सूप और ड्राई फ्रूट्स लें। मौसमी सब्जियां, टमाटर, पालक, लहसुन, संतरा और पपीता सेहत के साथ त्वचा के लिए भी लाभकारी होते हैं। टमाटर में केरोटीन तत्व होता है, जो रक्त को साफ करता है, वहीं पालक कैल्शियम देने के साथ हीमोग्लोबिन की मात्रा को बढ़ाता है। ग्रीन टी, लेमन जूस और शहद अच्छा विकल्प हंै। रोजमर्रा के डेयरी प्रोडक्ट्स पर ज्यादा ध्यान दें। साथ ही अंजीर, किशमिश, ड्राई फ्रूट्स और पर्याप्त मात्रा में हरी सब्जियों को शामिल करें।

खूब सारा पानी पिएं

सर्दियों में पसीना नहीं आता है तथा हवा में भी मॉइस्चर होता है, जिस कारण प्यास कम लगती है। ठंड होने के कारण हम सब गर्म चाय, कॉफी या फिर कोई और गर्र्म ंड्रक लेना पसंद करते हैं। लेकिन ऐसा करने से शरीर में पानी की कमी हो जाती है, जिससे त्वचा में ड्राईनेस आ जाती है। पानी शरीर के साथ-साथ चेहरे की त्वचा को भी हाइड्रेट रखता है। पानी पीने से शरीर और त्वचा से हानिकारक टॉक्सिन और तेल पसीने के साथ बाहर निकल जाता है और आपकी त्वचा स्वस्थ रहती है। दिन भर में कम से कम 10 गिलास पानी पिएं। हल्के गर्म पानी में नीबू की कुछ बूंदें डालकर लेने से भी शरीर में डीहाइड्रेशन की समस्या नहीं होती।
गर्म तेल की मसाज 
सर्दियों में त्वचा की देखभाल करने का आदर्श तरीका है शरीर को गर्म तेल की मसाज देना। सर्दियों में त्वचा को मॉइस्चराइज रखने के लिए मसाज लें। आप खुशबूदार माहौल और कैंडल्स के साथ आयुर्वेदिक तेल, तिल के तेल, बादाम के तेल या सरसों के तेल से मसाज के जरिए तनाव भगा सकते हैं। इस मौसम में हर दो-तीन दिन में चेहरे की मसाज जरूरी है, ताकि मांसपेशियों में रक्त संचार ठीक रहे।
बच्चों और बुजुर्गों की त्वचा होती है खास, रखें ध्यान

आर्मी से रिटायर्ड शिशु रोग विशषज्ञ डॉ. पी. र्के. ंसह कहते हैं कि बच्चों की त्वचा कोमल होती है और बुजुर्गों की त्वचा में अलग तरह की कमी होती है, इसलिए उसकी विशेष देखभाल की भी जरूरत होती है। सर्दियों में त्वचा की देखभाल का मतलब सिर्फ चेहरे की त्वचा की देखभाल करना ही नहीं, बल्कि इसका अर्थ पूरे शरीर की त्वचा की सुरक्षा करना है। बच्चों को सॉफ्ट सोप से नहलाना चाहिए। नहलाने से पहले तेल मालिश करने से उनकी त्वचा नर्म और साफ रहती है। त्वचा की नमी बरकरार रखने के लिए हल्का मॉइस्चराइजर उपयोग कर सकते हैं। बच्चों की त्वचा की सफाई के लिए क्र्लींंजग और मॉइस्चरार्इंजग बहुत जरूरी है। उनके लिए इस्तेमाल होने वाले साबुन, शैंपू, लोशन आदि का चुनाव करते समय ध्यान रखें कि प्रोडक्ट्स सौम्य हों और खासतौर पर उन्हीं के लिए बने हों। बुजुर्गों के लिए भी तेल और साबुन का चयन उनकी त्वचा की जरूरत को ध्यान में रखते हुए करें





Monday, 12 August 2019

बरसात के मौसम में कैसे रखे सेहत का ध्यान व बीमारियों से कैसे बचें -How to take care of health and avoid diseases during the rainy season by WISE HEALTH

                               Rainy Season 

             बरसात  के दिनों में आसमान से बरसते ठंडे पानी से मिलने वाला सुकून हर किसी की चाहत होती है। गर्मी से परेशान लोग बरसात का मौसम आते ही खुश हो जाते हैं, लेकिन ये मौसम अपने साथ कई तरह की बीमारियां लाता है । आईये बात करते हैं उन्हीं बीमारियों और उनके उपचार के बारे में जो बरसात के दिनों में होती है :-

बरसात के मौसम में कैसे रखे सेहत का ध्यान व बीमारियों से कैसे बचें  How to take care of health and avoid diseases during the rainy season by WISE HEALTH


बरसात का सुहाना मौसम कई बार तकलीफ का  कारण बन जाता है। बारिश चाहे कम हो या ज्यादा, लेकिन बीमारियां आती जरूर है । ऐसे में ज़रूरत है बरसात से जुड़ी समस्याओं की रोकथाम और इलाज की पूरी जानकारी का होना।

भीषण गर्मी के बाद  हर कोई बेसब्री से बरसात  के मौसम का इंतजार करता है। बारिश की बूंदों से मिलने वाला सुकून हर किसी की चाहत होती है। गर्मी से परेशान लोग बरसात का मौसम आते ही खुश हो जाते हैं। बारिश में भीगने का अलग ही आनंद है इसलिए कई लोगों के लिए मानसून किसी उत्सव या किसी त्योहार से कम नहीं होता  है।

   बरसात का मौसम  अपने साथ कई तरह की बीमारियां जैसे कि डेंगू, चिकनगुनिया, पीलिया, टायफाइड, डायरिया आदि लेकर आता है। आज हम बरसात के मौसम में होने वाली उन्हीं बीमारियों और उनके उपचार के बारे में चर्चा करेंगे जिनकी वजह से सावन के मनोहर वातावरण की किरकिरी होने में देर नहीं लगती।

खांसी -जुकाम 

खांसी -जुकाम

बारिश के मौसम में यह बीमारी आम है। काफी देर तक शरीर में नमी रहने के कारण सर्दी-खांसी के बैक्टीरिया जन्म लेते हैं जिससे सर्दी-जुकाम, बुखार और खांसी जैसे रोगों की संभावना बढ़ जाती है। इससे बचाव के लिए बारिश में भीगने से बचना जरुरी है। अगर किसी वजह से भीग भी जाते हैं तो तुरंत कपड़े बदलकर सूखे कपड़े पहन लेना चाहिए। सर्दी-जुकाम से संक्रमित व्यक्तियों से संपर्क के बाद हाथ ठीक से धोएं। अधिक परेशानी होने पर डॉक्टर से संपर्क करें।

खुजली और दाने

मानसून के आते ही शरीर में फंगस(Fungus), दाद, खाज, खुजली और लाल रंग के दाने लोगों को परेशान करने लगते  हैं। यह समस्या परिवार के एक सदस्य से दूसरे को तेजी से फैलती  है। ऐसे में बिना देर किये  डॉक्टर को दिखाएं, खुद से इलाज न करें, संक्रमित व्यक्ति के कपड़ो को सबके कपड़ो से अलग रखे ।


मलेरिया

बारिश में जगह-जगह पानी इकट्ठा हो जाने से मलेरिया की संभावना काफी प्रबल रहती है। मादा एनिफिलीज मच्छर के काटने से होने वाला यह रोग एक संक्रामक रोग है और दुनिया के सबसे जानलेवा बीमारियों में से एक है। इसलिए इसे हल्के में लेना भारी पड़ सकता है। यदि बुखार और बदनदर्द के साथ आपको कंपकंपाहट हो रही है तो यह लक्षण मलेरिया के हैं। मच्छरों के काटने से खुद का बचाव करना इसके रोकथाम का पहला मंत्र है। इसके लिए रात को सोते समय मच्छरदानी का प्रयोग, घर के आसपास पानी न इकट्ठा होने देना और नालियों में डीडीटी का छिड़काव जैसे तरीके अपनाए जा सकते हैं। मलेरिया के लक्षण दिखते ही तुरंत डॉक्टर से संपर्क करने में ही समझदारी है।


हैजा

दूषित जल और अस्वच्छता की बरसात के मौसम में कोई कमी नहीं होती और इनकी वजह से फैलने वाला रोग जिंदगी का सबसे बड़ा खतरा बन सकता है। आस-पास की गंदगी हैजा फैलने का सबसे बड़ा कारण है। इस रोग के होने पर दस्त और उल्टियां आती हैं, पेट में तेज दर्द होता है, बेचैनी और प्यास की अधिकता हो जाती है। इससे बचने के लिए आसपास की सफाई के अलावा पानी उबालकर पीना चाहिए। इस रोग से बचाव का सबसे अच्छा उपाय टीकाकरण है। यह सुलभ भी है और सबसे ज्यादा विश्वसनीय भी। समय रहते रोगी का उपचार जरुरी है क्योंकि हैजा जानलेवा भी हो सकता है।


टाइफाइड

   टाइफाइड , मानसून के दिनों की सबसे खतरनाक बीमारियों में से एक है । संक्रमित जल और भोजन से होने वाले इस रोग में तेज बुखार आता है जो कई दिनों तक बना रहता है। ठीक होने के बाद भी इस बीमारी से होने वाला संक्रमण रोगी के पित्ताशय में जारी रहता है जिससे जीवन का खतरा बना रहता है। संक्रामक रोग होने के कारण टाइफाइड के रोगी को लोगों से दूर रहना चाहिए। टीकाकरण इस बीमारी को रोकने के लिए बहुत जरुरी है। ज्यादा से ज्यादा तरल पदार्थों का सेवन इस रोग से बचाव के लिए फायदेमंद होता है।


डेंगू और चिकनगुनिया

बारिश के मौसम में डेंगू और चिकनगुनिया ऐसी बीमारियां हैं जो बहुत ज्यादा फैलती  हैं। दरअसल, डेंगू और चिकनगुनिया बारिश में इसलिए भी खतरनाक होती हैं क्योंकि डेंगू और चिकनगुनिया का लार्वा नमी मिलते ही सक्रिय हो जाता हैं। आपको जानकर हैरानी होगी जहां मरम्मत या निर्माण का काम चल रहा होता है वहां डेंगू और चिकनगुनिया का लार्वा सबसे ज्यादा पाया जाता है। पानी भरे होने के कारण लार्वा जल्दी एक्टिव हो जाता है। डेंगू और चिकनगुनिया मादा एडिस एजिप्टी मच्छर के काटने से फैलते हैं। डेंगू और चिकनगुनिया के लक्षणों में तेज बुखार, जोड़ों में दर्द, मसल्स में और हड्डियों में दर्द की शिकायत, शरीर पर लाल चकते पड़ना, सिरदर्द होना और हल्की ब्लीडिंग होना बहुत आम है।

पीलिया

खून में Penicillin(पेनीसिलिन) नामक एक रंग होता है, जिसके बढ़ने से त्वचा पीली पड़ने लगती है। इस दशा को पीलिया या जॉन्डिस कहते हैं। दूषित पानी पीने से और कच्ची सब्जियां खाने आदि से यह बीमारी फैलती है। पेट में सूजन आना, भूख कम लगना, उल्‍टी या कब्‍ज की समस्या, सिरदर्द और थकावट इसके प्रमुख लक्षण हैं। अगर आपको ऐसे कोई भी लक्षण दिखाई दें तो आप डॉक्टर से सीधे सम्पर्क करें। इसके अलावा बारिश के मौसम में पानी उबाल कर पिएं। दूषित पानी के सम्पर्क में आने से बचें। प्रोटीन युक्‍त खाना खाएं, ग्‍लूकोज लें और गन्‍ने का रस पीएं।

यैलो बुखार

लेप्टोस्पायरोसिस(Leptospirosis)को फील्ड फीवर, रैट काउचर्स यैलो और प्रटेबियल बुखार के नाम से भी जाना जाता है। ये एक संक्रमण है जो लेप्टोस्पाइरा कहे जाने वाले कॉकस्क्रू आकार के बैक्टीरिया से फैलता है। बैक्टीरिया से फैलने वाला लेप्टोस्पाइरोसिस रोग बारिश के मौसम में सबसे ज्यादा होता है। यह रोग ऐसा है जो खुद ही कई और रोगों को पैदा करने का कारण भी हो सकता है। इस रोग का बैक्टीरिया मानव में सीधे ही प्रवेश न करके जीवों जैसे भैंस, घोड़ा, बकरी, कुत्ता आदि की सहायता से प्रवेश करता है और इस बैक्टीरिया का नाम है लैप्टोस्पाइरा। यह बैक्टीरिया इन जानवरों के मूत्र विसर्जन से प्रकृति में आता है। यह नमी युक्त वातावरण में लम्बे समय तक जीवित रहता है। इसके लक्षणों में हल्के-फुल्के सिरदर्द, मांसपेशियों में दर्द और बुखार से लेकर फेफड़ों से रक्तस्राव या मस्तिष्क ज्वर जैसे गंभीर लक्षण शामिल हो सकते हैं।


1. अपने साथ हमेशा बारिश से बचने का इंतजाम रखें : बारिश के मौसम में खुद की सुरक्षा की तरह यह एकदम सही कदम होगा। अपने साथ एक बड़ा छाता या रेनकोट रखें। अपने सिर को न भीगने दें।
2. गंदे पानी के संपर्क में न आएं : चाहे पानी रोड पर भरा हो या मौका पानी पीने का हो। आपको हर तरह से खुद को खराब पानी से दूर रखना है। गंदा पानी अंदर से और बाहर आपको भारी नुकसान पहुंचाता है। फंगल इंफेक्शन और बैक्टेरियाजनित इंफेक्शन से बचने के लिए पानी पर विशेष ध्यान दें।
3. विटामिन सी की उचित मात्रा लें : बारिश के मौसम में विटामिन सी से भरपूर चीज़ों का सेवन बढ़ा दें। विटामिन सी आपके शरीर की इम्यूनिटी बढ़ाने के अलावा, सर्दी को भगाने का काम तेजी से करता है।
4. पैरों और नाखून को साफ रखें : अपने पैरों और नाखूनों की सुरक्षा पर विशेष ध्यान दें। यहां आपको इंफेक्शन से बचना है। नाखून के माध्यम से गंदगी को शरीर में जाने से
रोकना जरूरी है। खुद की सफाई करते रहें। बार बार हाथ धोएं और हो सकें तो अपने साथ एक हैंडसेनेटाइजर रखें।
5. बारिश में भीगने के बाद एक बार और नहाएं : आपको सुनकर भले ही अजीब लगे लेकिन यह जरूरी है। अगर आप बारिश में भीग गए हैं तो नहाने से आपको इंफेक्शन होने का खतरा लगभग खत्म हो जाएगा। बढ़िया से स्नान के बाद, खुद को सुखाएं।
`6. बाहर खाने से बचें : स्ट्रीट फूड या खुले में रखे खाने को खाने से बचें। आपकी इच्छा जरूर होगी लेकिन ये मौसम बीमारियों का मौसम है। आप बीमार पड़ सकते हैं।
7. गर्म पीने की कोशिश करें : बारिश के मौसम में तापमान नीचे जाता है। अपने आप ही आपको कुछ गर्म खाने का मन करेगा। सूप, गर्म दूध या अदरक की चाय जैसे कुछ ऑप्शन आप अपना सकते हैं। आपको तुरंत अच्छा महसूस होगा साथ ही आपके स्वास्थ्य के लिए भी यह अच्छा साबित होगा।
8. खुद को सूखा रखें : अगर आप भीग गए हैं तो आप मुश्किल में हैं। आप गीले बैठे हैं। हो सकता है गीले ही एसी कमरे में चले जाएं। पंखे के नीचे खुद को सुखाने की कोशिश करें। इतनी देर में आपको सर्दी और इंफेक्शन का खतरा है। बेहतर होगा अपने साथ दूसरे कपड़े बदलने का इंतजाम रखें।

9. डाइट पर ध्यान दें : अपनी डाइट को बदल ले । यह मौसम भारी और अधिक खाने का नहीं है, हल्का सुपाच्य और हेल्दी खाना खाएं। कम खाना  खाने की कोशिश करें। खाना बनाने और स्टोर करने में सफाई का  ख्याल रखें। कीड़ों से घर को सुरक्षित रखने की कोशिश करें।
10. हर्बल टी और पेय पीते रहें : साधारण चाय और सूप के अलावा हर्बल टी को भी इस मौसम में अपनाना अच्छा रहता है । लौंग, हल्दी, तुलसी, अदरक और केसर के प्रयोग से बने पेय पीते रहना चाहिए , इनसे  न केवल  आपका तापमान संतुलित रहेगा बल्कि आपका इम्यूनिटी सिस्टम भी मजबूत होगा।

अधिक परेशानी होने पर डॉक्टर से संपर्क करें।

Wednesday, 12 June 2019

वेज(शाकाहारी ) डाइट के फायदे एवं नुकसान -Benefits and disadvantages of vegetarian diet in Hindi


शाकाहारी भोजन अगर आप शाकाहारी हैं और यह सोचकर परेशान हैं कि आपकी सेहत का क्या होगा तो आपको इस बात पर ध्यान देने की जरूरत है कि सेहत बनाने के लिए  और शरीर को स्वस्थ रखने के लिए शाकाहारी भोजन में भी कई विकल्प मौजूद होते  हैं, जोकि हमें  मांसाहार के बराबर ही पोषक तत्व प्रदान करते  हैं। भोजन वही अच्छा होता है जिसमे प्रोटीन , कर्बोहाइड्रेट( Carbohydrates), वसा (fats) , विटामिन ,खनिज लवण , रेशा और जल तत्व मौजूद हों। शाकाहारी भोजन में शामिल अनाज , दाल , सब्जी , फल और दूध आदि से ये सभी(प्रोटीन , कर्बोहाइड्रेट( Carbohydrates), वसा , विटामिन ,खनिज लवण) लाभदायक तत्व भरपूर मात्रा में मिल जाते है।
इसके अलावा कई प्रकार के एंटीऑक्सीडेंट्स और विटामिन शाकाहारी खाने से ही मिलते है जो बीमारियों से लड़ने में मदद करते है। शाकाहारी भोजन में संतृप्त वसा(Saturated fat) और कोलेस्ट्रॉल की मात्रा कम होती है। जिसके  कारण शाकाहारी भोजन से Heart problem होने की संभावना कम होती है।

शाकाहारी भोजन  में रेशे की  मात्रा भरपूर होती है जिसके कारण आँतों की सफाई सुचारू रूप से  होती  रहती है। जिससे  ब्लड प्रेशर नियंत्रित रहता है व कोलेस्ट्रॉल , डायबिटीज और कैंसर से बचाव होता है।

रेशे के कारण भूख जल्दी नहीं लगती जिससे कि हम  जरुरत से ज्यादा खाने से बच जाते है। इस तरह से शाकाहारी भोजन मोटापे से बचाता है क्योंकि  मोटापा अपने साथ कई प्रकार की बीमारियां जैसे डायबिटीज , ब्लड प्रेशर , हृदय रोग आदि लेकर आता है।

शाकाहारी डाइट के फायदे -Benefits of vegetarian diet

फल और सब्जियों के फायदे 

पपीता में पैपेन एंजाइम व बीटा कैरोटीन नामक तत्व पाए जाते हैं, जो पाचन क्रिया को दुरुस्त बनाते हैं। नियमित सेब खाने से हम कैंसर से बचे रहते हैं। केले में कैरोटिनॉइड यौगिक पाया जाता है, जिससे अंधेपन का खतरा दूर होता है। नाशपाती में फाइबर का खजाना होता है। अनानास का रस चर्बी को पिघलाकर निष्कासित करता है। अंगूर के रस का नियमित सेवन करने से माइग्रेन की समस्या से काफी राहत मिलती है।
फल और सब्जियों का सेवन कई बीमारियों को दूर करने में मददगार हो सकता है। फल और सब्जियों का सेवन नवयुवाओं में नया जोश भरता है और उन्हें डिप्रेशन और बेचैनी से निजात दिला सकता है। जिन युवाओं ने फल और सब्जियों का प्रचुर मात्रा में सेवन किया उनका मानसिक स्तर जंक फूड खाने वाले युवाओं के मुकाबले बेहतर रहा।

Vitamin B12

Vitamin B12 शरीर के लिएबहुत  लाभकारी तत्व है। यह रक्त में नयी कोशिकाओं को बनाने में सहायक होता है। यह हमारे Nervous system को भी दुरुस्त रखता है। बढ़ते बच्चों के लिए यह लाभकारी होता है। यदि शरीर को पर्याप्त मात्रा में  विटामिन न मिले तो एनीमिया जैसी समस्याए  पैदा हो  सकती है।

मांसाहारी भोजन में Vitamin B12 अधिक मात्रा  में पाया जाता है, लेकिन इसके शाकाहारी स्रोत भी हैं। दूध, दही, पनीर भी Vitamin B12 के बेहतरीन स्रोत हैं। इनमें वसा भी प्रचुर मात्रा में होती है।

कैल्शियम, आयरन और Vitamin C  के लिए आप लाल मिर्च, नींबू सलाद, हरी पत्तेदार सब्जियों आदि का भी सेवन कर सकते हैं।

आयरन

आयरन सेहत के लिए एक आवश्यक खनिज  है। यदि शरीर में इसकी कमी हो जाए तो इससे याददाशत कमजोर होना, एकाग्रता में कमी जैसी समस्याएं हो सकती हैं।

आयरन की कमी को पूरा करने के लिए साबुत अनाज का आटा जैसे गेहूं चावल आदि, हरी पत्तेदार सब्जियां फलीदार सब्जियां, सूखे मेवे का सेवन किया जा सकता है।

जिंक

शारीरिक विकास के लिए जिंक काफी महत्वपूर्ण है। जिंक शरीर मे हार्मोन को संतुलित रखने, त्वचा को स्वस्थ बनाने, शरीर को संक्रमण से बचाने व शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने में सहायक होता है। इसकी कमी से शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता कम हो जाती है। शरीर जल्दी थकने लगता है।

बालों का झड़ना व दस्त आदि बीमारियां भी लग जाती हैं। हरी फलीदार सब्जियां, साबुत अनाज, जैसे राजमा, छोले आदि व सूखे मेवे भी जिंक का भरपूर स्रोत हैं।

कैल्शियम

मानव शरीर के लिए कैल्शियम सबसे महत्वपूर्ण खनिज है। शरीर की हड्डियों व दांतों की मजबूती के लिए यह अति आवश्यक है।

कैल्शियम की कमी से शरीर में हड्डियों का कमजोर होना या फिर ऑस्टियोपोरोसिस नामक बीमारी भी हो सकती है। दूध और डेयरी उत्पादों, हरी पत्तेदार सब्जियों, सूखे मेवे और बीज, सूखे फल का सेवन इस कमी को पूरा करता है।

प्रोटीन

आपकी शाकाहारी डाइट को ध्यान में रखते हुए आप सोयाबीन की बड़ियों और फलियों का सेवन कर सकते हैं। शोध और अध्ययन भी बताते हैं कि सोयाबीन से मिलने वाली प्रोटीन की मात्रा मांसाहारी भोज्य पदार्थों से मिलने वाली मात्रा के बराबर ही होती है।

शाकाहारी डाइट के नुकसान –disadvantages of vegetarian diet



शाकाहारी भोजन करने वालों में एक समय के बाद Vitamin B12 तथा ज़िंक , कुछ विशेष ओमेगा- 3 , Vitamin D 3 , सल्फर , या खून की कमी हो सकती है। शाकाहारी भोजन  में मौजूद लोह तत्व आसानी से शरीर में अवशोषित नहीं होते ।इसलिए अक्सर खून की कमी होने की परेशानी पैदा हो जाती है विशेषकर महिलाओं में माहवारी आदि के कारण यह समस्या होने की संभावना अधिक होती है। भारत जैसे देश में जहाँ अधिकतर लोग शाकाहारी है , ऐसा नहीं है की हार्ट की, डायबिटीज की या ब्लड प्रेशर की समस्या कम है। जो लोग शारीरिक गतिविधि कम करते है , स्मोकिंग या नशा आदि करते है या अधिक तला हुआ और ज्यादा घी खाते है ,उन्हें इस प्रकार की समस्या हो जाती है।
अतः पूरी तरह यह कहना गलत होगा कि शाकाहारी खाने से नुकसान हो ही नहीं सकता। इसके अलावा फल , सब्जी आदि में पेस्टिसाइड्स की मात्रा बहुत होती है।फलों को पकाने के लिए कई प्रकार के Harmful chemicals काम में लिए जाते है। गाय , भैंस का दूध Oxytoxin  के इंजेक्शन लगा कर निकाला जाता है जो कैंसर का कारण बन सकते है।

हेल्थ से सम्बंधित अधिक लेख पढ़ने के लिए हमारी वेबसाइट पर विजिट करें :https://www.wisehealths.com/

Tuesday, 11 June 2019

स्ट्रेस क्या है ? जानिए इसके लक्षण ,कारण और उपाय (What is stress and how to manage it?

                                                Stress 
मानसिक तनाव(Stress ) आजकल लोगो पर इतना हावी हो चुका है कि  लोगो को मनोचिकित्सा  का सहारा लेना पड़ रहा है| यह एक गंभीर बीमारी का रूप लेती जा  रही है जिसका इलाज काफी मुश्किल  है|हमें  हर रोज  अपनी जिंदगी में बहुत  मुश्किलों का सामना करना पड़ता  हैं। कई बार ऐसे हालात पैदा हो जाते हैं जिनसे हम चाह कर भी  संभाल नहीं पाते और  उनसे निपटने के चककर में हम काफी टेंसन (stress ) में चले जाते हैं
हम में से कई लोग तो  तनावों को झेलते हुए इतने  आदी हो चुके होते हैं कि वें महसूस ही नहीं कर पाते। ऐसे तनाव को यूस्ट्रेस (Eustress) कहा जाता है। अगर देखा जाए तो ये तनाव आपकी परफॉरमेंस और काम करने की क्षमता पर निगेटिव असर(negative effoct ) डालता है।

इस आर्टिकल में हम discus करेंगे कि  तनाव/टेंशन क्या है, तनाव के लक्षण, कारण और टेंशन से बचने के उपाय क्या हैं ?


स्ट्रेस क्या है? (What is stress?) :
स्ट्रेस या तनाव होना सामान्य सी  बात है। ये तब महसूस होता है जब किसी स्थिति से निपटना मुश्किल हो जाता है। टेंशन होने पर एड्रेनालाईन (Adrenaline -When a stressful situation occurs and your heart begins to race, your hands begin to sweat, and you start looking for an escape, you have experienced a textbook case of fight-or-flight response.) हमारे पूरे शरीर में दौड़ने लगता है जिससे  दिल की धड़कन बढ़ जाती है और मानसिक और शारीरिक चेतना बहुत ज्यादा बढ़ जाती है। हमें पसीना आता है, सनसनी महसूस होती है और कई बार पूरे शरीर के रोएं खड़े हो जाते हैं।

कितना खतरनाक(Harmfull ) है तनाव?

ऐसा नहीं है कि हमारे पूर्वजों(बुजुर्गों ) की जिंदगी में Stress नहीं  था, लेकिन वो करो या मरो (Do or Die )की स्थिति को अपनाकर आसानी से इससे निजात  पा सकते थे। आज हमारे जीवन में तनाव की मात्रा और उनकी आवृत्ति भी बहुत  ज्यादा ही  है। लेकिन सबसे मुश्किल  बात यह है कि Stress  देने वाले हार्मोन जैसे एड्रेलिन और कॉर्टिसोल का उत्सर्जन उस वक्त और ज्यादा harmfull  हो जाता है जब हमें उनकी जरूरत नहीं होती है । अगर तनाव लंबे वक्त तक रहेगा  तो हमारे इम्यून सिस्टम और हृदय को नुकसान पहुंच सकता है। इसके अलावा  तनाव के रहते  हमारी शारीरिक और मानसिक क्षमतापर भी प्रभाव पड़ता  है। इसका मतलब यह  है कि तनाव उस वक्त और  भी ज्यादा खतरनाक हो जाता है जब  हर पांच मिनट में करो या मरो (Do or Die )की स्थिति में जाना पड़े।

ज्यादा तनाव होने  से :
हमारे  इम्यून सिस्टम और हृदय को नुकसान पहुंच सकता है।
गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ता  है।
उम्र कम होती है।


तनाव को समझना क्यों जरूरी है? (Why does understanding stress matter?)

तनाव के कारण कई गंभीर मानसिक समस्याएं हो सकती हैं। भारत में हर चार में से एक इंसान हर साल Stress का शिकार हो  जाता है। तनाव के कारण  कई बार हम लोग काम करते हुए भी लंबे वक्त तक काम पर ध्यान केंद्रित नहीं कर पाते हैं।

अगर मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं को लंबे वक्त तक अनदेखा किया जाए जो ये गंभीर समस्या में बदल सकती  है। देश में Stress  और depression का इलाज करवाने वाले मरीजों में से तीन चौथाई महिलाएं हैं। लेकिन जो तीन चौथाई लोग टेंशन और डिप्रेशन के चलते आत्महत्या कर लेते हैं वह पुरुष हैं। चूंकि डिप्रेशन और टेंशन ही सुसाइड के मामलों के लिए अधिक  जिम्मेदार  साबित हुये  हैं इसलिए इसका  इलाज जरुरी है |

क्यों होता है तनाव? (What causes stress?)

आजकल होने वाले तनाव के सामान्य कारण निम्नलिखित हैं। जैसे -
1.काम
2.बेरोजगारी
3.पैसा
4.अलगाव और कुछ अन्य कारण जैसे घर छोड़ना
5.पार्टनर से ब्रेकअप
6.नौकरी में बदलाव होना
7.बच्चों का घर छोड़ना
8.आपका स्वास्थ्य और मूड
9.मौसम
10.पार्टनर का निधन होना या करीब न होना
11.तलाक के कारण परिवार टूट जाना
12.नशाखोरी और ड्रिंक करना
12.बुरी आदतों का शिकार होना
14.हिंसा या बुरे व्यवहार का शिकार होना

थोड़ी देर के लिए जीवन में उतार-चढ़ाव आना तो जरुरी  है लेकिन अगर ये लंबे वक्त तक बने  रहे तो ये जिंदगी से जुड़ी बाकी चीजों को भी नष्ट  कर सकती है। वैसे भी तनाव इसलिए कभी नहीं होता क्योंकि आप कमजोर हैं बल्कि हमेशा इसलिए होता है कि आप उसकी मौजूदगी होने के बाद भी टेंशन को रहने देते हैं और उसका विरोध नहीं करते  हैं।

तनाव होने पर हमेशा चीजों को सकारात्मक तरीके से देखने और सोचने  की कोशिश करनी चाहिए। कुछ मामलों में हो सकता है कि आपको Fresh Start  की भी जरुरत पड़े। लेकिन अगर आप लगातार नौकरियां, पार्टनर या घर बदल रहे हैं तो ऐसे हालात में आपको हालात नहीं बल्कि खुद को बदलने की जरुरत होती  है।

क्या हैं Stress के   चेतावनी देने वाले लक्षण (​What are the warning signs of stress ?)

अगर आपको इतना ज्यादा तनाव होता है कि संभलने का मौका तक नहीं मिल पाता है, तो ये आपके लिए खतरे की घंटी जैसा हो सकता है। इसलिए ये जानना बहुत जरुरी  है कि तनाव होने से पहले  वो कौन से  लक्षण हैं जिन्हें जानकर आप थोड़ी देर में होने वाले तनाव से पहले ही निपट सकते हैं।

टेंशन से पहले होने वाले सामान्य लक्षण इस प्रकार हैं:-

1.सामान्य से ज्यादा या कम भोजन करना।
2.तेजी से मूड बदलना।
3.आत्म-सम्मान में कमी आना।
4.हर वक्त टेंशन या बेचैनी महसूस करना।
5.ज्यादा या कम सोना।
6.कमजोर याददाश्त या भूलने की समस्या।
7.जरुरत से ज्यादा शराब या ड्रग्स लेना।
8.जरुरत से ज्यादा थकान या ऊर्जा में कमी होना।
9.परिवार और दोस्तों से दूर-दूर रहना।
10.ध्यान कें​द्रित न करना और काम में संघर्ष करना।
11.उन चीजों में भी मन न लगना जो पहले आपको पसंद थीं।
12.विचित्र अनुभव होना, उन चीजों का दिखना जो वहां हैं ही नहीं।
  इसके अलावा टेंशन के कुछ शारीरिक लक्षण भी हो सकते हैं जिनमें सिरदर्द, कब्ज या किसी खास अंग या शरीर में दर्द होना।

अपने अनुभव के बारे में कैसे बताएं? (How do I talk about how I'm feeling?)


हम सभी जानते हैं कि जब हम किसी से जुड़ाव/lagav महसूस करते हैं तो उससे बात करना हमेशा अच्छा लगता है। हम लोगों में से कुछ के लिए, सोशल मीडिया इसका सबसे अच्छा माध्यम है। लेकिन रिसर्च से पता चला कि सोशल मीडिया ही हम लोगों में से कई की जिंदगी की सबसे बड़ी मुसीबत बनकर सामने आया  है।

ये कहावत काफी पुरानी  भी है और सुनी भी सभी ने है  कि दर्द बांटने से कम होता है। लेकिन सच में  ये बात सही  है। ये लोगों को बताने के लिए नहीं है, ना ही ये साबित करने के लिए है कि आप जरुरत में हैं और किस दौर से गुजर रहे हैं। बल्कि ये उनसे समझने के लिए है कि अगर वह उस तकलीफ में होते तो क्या करते?

 कई बार जब हम टेंशन में होते हैं तो आसान से उपाय भी हमारे दिमाग में नहीं आते हैं। लेकिन दूसरे वही बात सुनकर हमें ऐसे रास्ते सुझा देते हैं जो हमारी हर मुश्किल को आसान बना देते हैं। इसलिए खुलकर संवाद करना भी बहुत जरूरी है। वैसे भी किसी से बात करना कौन सी बड़ी बात है।  इसलिए ईमानदारी से बात रखिए और दोस्तों को हर वो बात बता दीजिए जो आपको परेशान कर रही है।

घबराएं नहीं, डॉक्टर से सलाह लें 
क्या कभी आपको जुकाम, दस्त या फिर बुखार ​की समस्या हुई है? इन बीमारियों के इलाज के लिए आप जरूर ही डॉक्टर के पास भी गए होंगे। अगर हां, तो फिर टेंशन होने पर डॉक्टर के पास जाने में हिचक क्यों?

अगर आप सच में  टेंशन से उबरने में मुश्किल महसूस कर रहे हों तो बेहतर है कि बिना देर किए डॉक्टर के पास जाएं। मनोचिकित्सक सच में  बहुत धैर्य से मरीज की बात सुनते हैं और वह आपकी समस्या को औरों से बेहतर समझते हैं। उनके सामने बात रखने से वह न सिर्फ आपका सही इलाज कर सकते हैं बल्कि आपकी जिंदगी को नई राह भी दिखा सकते हैं।

टेंशन, डिप्रेशन जैसी समस्याएं भी उतनी ही आम बीमारी है जितनी कि जुकाम या बुखार होना। अगर आप उनके इलाज के लिए डॉक्टर के पास जा सकते हैं तो फिर टेंशन के इलाज के लिए क्यों नहीं? संकोच छोड़ दीजिए और डॉक्टर से इस मामले में बात कीजिए।

आशा करती हूँ कि ये जानकारी helpfull होगी |

हेल्थ से सम्बंधित अधिक लेख पढ़ने के लिए हमारी वेबसाइट पर विजिट करें :https://www.wisehealths.com/

बदलते मौसम कई बीमारियों को जन्म देता है। इस मौसम में सर्दी, जुकाम, खांसी तो आम बात है, लेकिन इनके अलावा ब्रेनस्ट्रोक, ...