Monday, 2 December 2019






Winter Care Tips: सर्दी में बदलें स्किन केयर रूटीन, यूं रखें त्वचा का ख्याल



बदलते मौसम कई बीमारियों को जन्म देता है। इस मौसम में सर्दी, जुकाम, खांसी तो आम बात है, लेकिन इनके अलावा ब्रेनस्ट्रोक, डाइबिटीज, हाईब्लड प्रेशर और दमा के मरीजों के लिए सर्दी और भी बड़ी मुसीबत बन सकती है।

सर्दियों में शुष्क हवा के कारण त्वचा रूखी और बेजान हो जाती है। ऐसे में सेहत के साथ-साथ त्वचा का ध्यान रखना भी जरुरी है । इस मौसम में त्वचा को हाइड्रेट(Hydrate) व मॉइस्चराइज्ड (Moisturize) रखना  जरूरती  होता  है, नहीं तो त्वचा को कई समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। आज हम आपको यही बताएंगे कि बदलते मौसम के साथ आपको अपनी स्किन(Skin ) की केयर किस तरह करनी चाहिए, ताकि त्वचा सर्दियों में होनी वाली समस्याओं से बची रहे।





सर्दियों में बदले स्किन केयरिंग  का तरीका


क्रीम बेस्ड क्लींजर का इस्तेमाल करें 

सर्दियों में शुष्क और ठंडी हवाएं त्वचा की नमी खींच लेती है। ऐसे में क्रीम बेस्ड क्लींजर का इस्तेमाल त्वचा के लिए बेहतर ऑप्शन है। यह ना सिर्फ त्वचा को नमी देता बल्कि इससे स्किन पोर्स भी साफ हो जाते हैं। साथ ही इससे स्किन तरोताजा भी रहती है।


मॉइश्चराइजर का इस्तेमाल करें 

इस मौसम में त्वचा को हाइड्रेट रखने के लिए जरूरी है कि आप मॉइश्चराइजर का इस्तेमाल रोजाना करें । इससे आपकी  स्किन में नमी बनी रहती है, और  आप सर्दियों में होने वाली स्किन प्रॉब्लम्स से बचे रहते हैं।

रेगुलर करें फेशियल स्क्रब

बदलते मौसम के साथ जब नई त्वचा आती है तो वह ज्यादा ग्लो करती हैं और डेड सेल्स को रिपेयर करने में भी मदद करती है। ऐसे में स्किन को स्मूद बनाने के लिए टाइम-टू-टाइम फेशियल स्क्रब करते रहें।

स्किन टाइप के हिसाब से यूज करें प्रोडक्ट्स

सर्दियों में किसी भी चीज का इस्तेमाल करने से पहले अपनी स्किन टाइप भी जान लें। आप चाहें तो इसके लिए डर्मेटोलॉजिस्ट से भी संपर्क कर सकती हैं।

सही और संतुलित आहार भी है जरूरी

इस मौसम में आपको ऐसी चीजों का सेवन करना चाहिए, जिससे त्वचा में पानी की कमी पूरी हो। इसके अलावा अपनी डाइट में ओमेगा 3 व 6, विटामिन्स और मिनरल्स से भरपूर चीजें भी लें। साथ ही अपनी डाइट में मछली, नट्स, ऑलिव ऑयल, अलसी के बीज और एवोकाडो को शामिल करें।

नर्म व मुलायम होंठों के लिए

सर्दियों में होंठ भी रूखे होकर फटने लगते हैं इसलिए इनका ध्यान रखना भी जरुरी है । इसके अलावा रात को सोने से पहले अपने होंठों पर मलाई या नारियल तेल जरूर लगाएं, इससे होंठों पर नमी बनी रहेगी और फटेंगे भी  नहीं।

गुनगुने पानी से  स्नान करें

अक्सर लोग इस मौसम में गर्म पानी से नहाना पसंद करते हैं लेकिन इससे त्वचा को नुकसान पहुंचता है। ऐसे में बेहतर होगा कि आप नहाने के लिए गुनगुने पानी का इस्तेमाल करें। आप चाहे तो नहाने वाले पानी में कच्चा दूध भी मिला सकते हैं। इससे त्वचा कोमल रहती है।

खूब  पानी पीएं

सर्दी हो या गर्मी, खूब पानी पीएं, ताकि त्वचा नमीयुक्त और हाइड्रेट रहे। त्वचा में पानी पर्याप्त मात्रा में होगा तो सेल्स डेड नहीं होंगे और स्किन ग्लो करेगी।

रूखे-सूखे हाथों के लिए

हाथों की स्किन अगर काफी रूखी है तो इसके लिए या तो नींबू और चीनी को घोलकर उसे हाथों पर लगाएं। फिर थोड़ी देर बाद हाथों को गुनगुने पानी से साफ करें। इसके अलावा शहद और नींबू को मिलाकर लगने से भी फायदा होगा।

पैरों का भी रखें ध्यान

सर्दियों में एड़ियां ज्यादा ड्राई हो जाती हैं और कई बार तो फटने भी लगती है। ऐसे में अगर प्रॉपर साफ-सफाई न की जाए तो पैरों की खूबसूरती छिन जाती है। पैरों की सफाई डिटॉल मिले गुनगुने पानी से करें। मॉइस्चराइजर के प्रयोग के बाद भी अगर पैर की त्वचा खुश्क रहती है तो आप मेनीक्योर और पेडीक्योर का सहारा ले सकती हैं। 

इन बातों का भी रखें ख्याल

-सर्दियों में त्वचा को कोमल बनाए रखने के लिए बादाम के तेल का इस्तेमाल करना बहुत फायदेमंद होता है।
-इस मौसम में साबुन का इस्तेमाल करने से बेहतर है कि सरसों के उबटन का इस्तेमाल करें।
-बाजार में बिकने वाले स्क्रब के स्थान पर चीनी के स्क्रब का इस्तेमाल करें। इससे डेड स्‍क‍िन भी साफ हो जाएगी और चेहरे का मॉइश्चर भी बना रहेगा।
-नहाने के बाद हल्के हाथों से तौलिए का इस्तेमाल करें। संभव हो तो नहाने के तुरंत बाद नारियल के तेल से या किसी ऑयली बॉडी लोशन से पूरे शरीर पर मसाज करें।
-चेहरा धोने के लिए न तो बहुत अधिक गर्म पानी का इस्तेमाल करें और न ही बहुत ठंडा।

बुजुर्गों के लिए इसलिए खतरनाक होती हैं सर्दियां 

सर्दियों में शरीर का लगातार तापमान गिरने लगता है, जिसके कारण हाइपोथर्मिया के होने का खतरा बढ़ जाता है। यह समस्या ख़ासकर बूढ़े लोगों में ज्यादा होती है। इस समय खास ध्यान रखकर इससे बचा जा सकता है।  फिजीशियन  बताते हैं, “जब शरीर का तापमान 97 डिग्री फारेनहाइट से कम हो जाता है। सर्दियों के मौसम में जब बाहर का तापमान कम होता और शरीर में गर्मी पैदा नहीं हो पाती है, उस समय ऐसा होता है। शरीर जितनी तेजी से गर्मी पैदा कर सकता है, उससे कहीं ज़्यादा तेजी से वह गर्मी खत्म कर सकता है। ऐसे में लोग हाइपोथर्मिया का शिकार होते हैं, जो उनके लिए जानलेवा हो सकता है।”

सर्दियों में तापमान कम होने पर उम्रदराज और बच्चे इसके ज़्यादा खतरे में होते हैं। ऐसे मौसम में शरीर को जितनी गर्मी की आवश्यकता होती है, उतनी वह बना नहीं पाता है। हाईपोथर्मिया के सबसे अधिक शिकार बच्चे या वृद्ध होते हैं। ग्रामीण क्षेत्र में अधिकतर शिशुओं की मृत्यु जन्म लेते ही हो जाती है। बच्चा मां के गर्भ में रहता है तब उसका तापमान कुछ ओर रहता है लेकिन जन्म के बाद तापमान में बदल जाता है। इस समय ही बच्चों को ठंड लगती है और या तो वह निमोनिया का शिकार हो जाता है, या थोड़ी ही देर में दम तोड़ देता है। आंकड़ों के अनुसार, हाइपोथर्मिया से होने वाली करीब 50 प्रतिशत मौत 65 वर्ष या उससे अधिक उम्र के लोगों में होती हैं। वृद्धों को कम उम्र के लोगों की तुलना में हाइपोथर्मिया से पीड़ित होने की आशंका सबसे अधिक होती है, क्योंकि ठंड से बचाव की शरीर की प्रणाली उम्र बढ़ने के साथ कमजोर होती जाती है। इसके अलावा उम्र बढ़ने के साथ सबक्युटेनियस वसा में कमी आ जाती है और ठंड को महसूस करने की क्षमता भी घट जाती है। उम्रदराज लोगों में डायबिटीज़ आदि बीमारियों की वज़ह से उनका शरीर ठंड को झेल पाने में कम सक्षम होता है। सीधे दवा विक्रेता से दवा लेकर सर्दी-जुकाम का इलाज करना भी इसका कारण बन सकता है।


क्या हैं लक्षण

                 हाइपोथर्मिया के धीमी, रुकती आवाज, आलस्य, कदमों में लड़खड़ाहट, हृदयगति और सांस और ब्लड प्रेशर बढ़ना लक्षण हैं। इससे युवाओं और बुजुर्गों को, खासकर जिनको मधुमेह या इससे जुड़ी बीमारियां हैं या जो मदिरापान या ड्रग का प्रयोग ज्यादा करते हैं, उन्हें होता है।

 कैसे बचाव करें 

प्राथमिक उपचार के तौर पर मरीज को सबसे पहले बंद गर्म कमरे में लेटा दें, उसके गीले कपड़े उतार दें, गर्म कपड़ों की परतें उन्हें पहना दें, इसके बाद गर्म कम्प्रैस या इंसुलेशन का प्रयोग करें। ध्यान रहे आपको ऐसे में सीधे हीट का प्रयोग नही करना है। टांगों और कंधों को गर्म रखने के लिए कंबल का प्रयोग करें और घर के अंदर सिर पर हैट या टोपी पहन कर रखें। ठंड में बाहर जाते समय, टोपी, स्कार्फ और दस्ताने ज़रूर पहनें, ताकि शरीर की गर्मी कम न हो। सिर को ढकना बेहद आवश्यक है, क्योंकि ज़्यादातर गर्मी सिर के जरिए बाहर जा सकती है। गर्मी को शरीर के अंदर बनाए रखने के लिए गर्म ढीले कपड़ों की कई परतें पहन कर रखें।



सर्दियों का मौसम आपको कई बीमारियों के करीब पहुंचा सकता है। अनेक बीमारियां इस मौसम में हमारे आसपास मंडराती रहती हैं। इनसे आप खुद को कैसे बचाए रख सकते हैं, बता रहे हैं एनडीएमसी के मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉं. अनिल बंसल

सर्दी, जुकाम, बुखार, त्वचा आदि समस्याएं सर्दियों के मौसम में आम होती हैं। जो लोग समय पर इन बातों का ध्यान रखते हैं और मौसम के अनुरूप अपना खयाल रखते हैं, उन्हें तो सर्दी की ये बीमारियां छू भी नहीं पातीं, लेकिन जो लोग बदलते मौसम में शरीर की जरूरतों का बिल्कुल ध्यान नहीं रखते, उन्हें कई बीमारियां अपनी चपेट में लेने को आतुर रहती हैं। ऐसे में क्यों न सावधानी बरतकर स्वस्थ रहा जाए।

सर्दी-जुकाम
इसे कॉमन कोल्ड भी कहते हैं, जो तापमान में परिवर्तन के कारण होता है। जिन लोगों की रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होती है, उन्हें यह जल्दी पकड़ता है। संक्रमण वाली इस बीमारी के वारयस से बचने के लिए साफ-सफाई का खास ध्यान रखना होता है। बार-बार हाथ को साबुन से धोते रहना चाहिए, ताकि संक्रमण से बचे रह सकें। यह वायरल इंफेक्शन है, इस कारण इसमें एंटीबायटिक की जरूरत नहीं होती और यह 5 से 7 दिन में खुद ही ठीक हो जाता है। इसमें एंटी एलर्जिक दवा दी जाती है, ताकि मरीज को आराम मिले। इसमें भाप, नमक के पानी के गरारे आदि काफी लाभदायक हैं। इसमें गर्म तरल पदार्थ का ज्यादा प्रयोग करना चाहिए। तुरंत गर्म से ठंडे में और ठंडे से गर्म में न जाएं, अन्यथा इससे इस संक्रमण की गिरफ्त में आ सकते हैं।

हाइपोथर्मिया
सर्दियों में अगर शरीर का ताप 34-35 डिग्री से नीचे चला जाए तो उसे हाइपोथर्मिया कहते हैं। इसमें हाथ-पैर ठंडे हो जाते हैं, सांस लेने में तकलीफ होती है। हार्ट बीट बढम् जाती है, बीपी कम हो जाता है। अगर शरीर का तापमान कम हो जाए तो मृत्यु भी हो सकती है। तेज ठंड का सामना न करें।

टॉन्सिलाइटिस
बच्चों में पाई जाने वाली यह आम समस्या भी टॉन्सिल में संक्रमण के कारण होती है। गले में काफी दर्द होता है। खाना खाने में दिक्कत होती है, तेज बुखार भी हो सकता है। यह बैक्टीरियल या वायरल संक्रमण से हो सकता है।  इससे बचे रहने के लिए इस मौसम में ठंडी चीजों का प्रयोग करने से बचें। गर्म भोजन और गुनगुने पानी का प्रयोग करें।

अस्थमा
यह एक एलर्जिक बीमारी है। जिन लोगों को यह बीमारी होती है, इस मौसम में उनकी तकलीफ बढ़ जाती है। सर्दियों में कोहरा बढ़ जाता है। एलर्जी के तत्व इस मौसम में कोहरे की वजह से आसपास ही रहते हैं, हवा में उड़ते नहीं हैं। इन तत्वों से अस्थमा के रोगियों को अधिक तकलीफ होती है। इस कारण इस मौसम में ऐसे लोगों के लिए धूल-मिट्टी से बचना बहुत जरूरी है। दवा खा रहे हैं तो उसे नियमित रूप से लें। कोई दवा चूकें नहीं, क्योंकि ऐसे में एलर्जेट अटैक कर सकते हैं।

बेल्स पाल्सी
इसे फेसियल पेरालिसिस कहते हैं। यह सर्दियों में बड़ा सामान्य है। इसमें मुंह टेड़ा हो सकता है, आंख खराब हो सकती है। कान के पास से सेवेंथ क्रेनियल नस गुजरती है, जो तेज ठंड होने पर सिकुड़ जाती है। इसकी वजह से यह बीमारी होती है। इसमें मुंह टेड़ा हो जाता है, मुंह से झाग निकलने लगता है, बोलने में जबान लड़खड़ाने लगती है और आंख से पानी आने लगता है। अगर आप लंबे समय तक ठंड में हैं तो कान की उस नस को नुकसान हो सकता है। खासकर ड्राइविंग करने वालों, रात में बिना सिर को ढके कहीं जाने वालों में इसका खतरा बढ़ जाता है, इसलिए मफलर का प्रयोग करें, गाड़ी के शीशे बंद रखें।

रूखी त्वचा
सर्दियों में अधिक कपड़े पहनने से शरीर को मॉइश्चर नहीं मिलता, जिससे त्वचा ड्राइ हो जाती है। इससे वे फटने लगती हैं। त्वचा को ड्राइ होने से बचाने के लिए मॉइश्चराइजर जरूर लगाएं। त्वचा को ड्राइनेस से बचाने के लिए मलाई या तेल का भी प्रयोग कर सकते हैं। होठों में भी यह समस्या आती है, इस मौसम में। इसके लिए घरेलू दवाएं या अपने डॉक्टर से सलाह लेकर दवा ले सकते हैं।

बदलते मौसम कई बीमारियों को जन्म देता है। इस मौसम में सर्दी, जुकाम, खांसी तो आम बात है, लेकिन इनके अलावा ब्रेनस्ट्रोक, ...